108 दिवसीय भक्तामर महास्तोत्र दीप आराधना की जा रही है। इसका समापन गुरुवार को सामूहिक प्रयास से पूर्ण होने जा रहा है। संरक्षक आरती सनत ने बताया कि गुरुवार प्रातः पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के बाद श्री ऋषभदेव विधान की विशेष पूजन विधानाचार्य अजय पंचोलिया के निर्देशन में कर अर्घ्य मंडल पर अर्पित किए गए। इंदौर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
इंदौर। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी के आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव एवं पंचम पट्टाधीश श्री वर्धमान सागर जी के अवतरण के 75 वंे वर्ष के उपलक्ष्य में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के आशीर्वाद एवं मुनि श्री चारित्र सागर जी महाराज की प्रेरणा, मुनि श्री निजानंद सागर जी महाराज के सानिध्य में निर्मित श्री आदिनाथ दिगंबर चैत्यालय, स्कीम नंबर 71 में प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक माघ कृष्ण चतुर्दशी 28 जनवरी से प्रतिदिन शाम 7.30 बजे से श्रीजी की आरती, भक्ति एवं 48 दीपकों से 108 दिवसीय भक्तामर महास्तोत्र दीप आराधना की जा रही है। इसका समापन गुरुवार को सामूहिक प्रयास से पूर्ण होने जा रहा है। संरक्षक आरती सनत ने बताया कि गुरुवार प्रातः पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के बाद श्री ऋषभदेव विधान की विशेष पूजन विधानाचार्य अजय पंचोलिया के निर्देशन में कर अर्घ्य मंडल पर अर्पित किए गए। शाम 7.30 बजे से 108 दीपकों से श्री जी की, मां जिनवाणी तथा आचार्य श्री की आरती एवं भक्ति की गई। इसके बाद 48 दीपकों से भक्तामर महास्तोत्र दीप आराधना समस्त भक्तामर महास्तोत्र आराधना भक्त परिवार जन द्वारा की गई।
भक्तामर महास्तोत्र विधान शुक्रवार को
अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम और पूजन तथा 108 दिवसीय भक्तामर महास्तोत्र आराधना के समापन के उपलक्ष्य में भक्तामर महास्तोत्र विधान शुक्रवार सुबह किया जाएगा। अध्यक्ष महेंद्र टी एवं सुनील ईशान सचिव ने बताया कि कार्यक्रम के बाद प्रभावना स्वरुप वात्सल्य भोजन पुण्यार्जक निखिल, रिया जैन, विशाल जैन, अविचल जैन ने रखा है। शाम 7.30 बजे से श्रीजी की, मां जिनवाणी की आरती एवं भक्ति समस्त भक्तामर महास्तोत्र आराधना भक्त परिवार जन द्वारा की जाएगी। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के आचार्य पद शताब्दी महोत्सव अंतर्गत 108 दिवसीय कार्यक्रमों में विभिन्न भक्तों द्वारा आचार्य, मुनिराज,आर्यिका माताजी के जन्म, दीक्षा, समाधि दिवस परिजनों के जन्म, विवाह सालगिरह, पुण्य तिथि पर प्रतिदिन 48 दीपकों से आराधना कर प्रभावना वितरण की गई।













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