पेशे से किसान, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देश के स्वनाम धन्य साहित्यकार बशीर अहमद मयूख एकमात्र ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने अर्हत जैन आगम सूक्तों का काव्य रूपांतर किया है। विगत दिनों उनका देहावसान हो गया। उन्होंने वेद, कुरान, गीता, उपनिषद, जैन-बौध आगम सूक्त, गुरुग्रंथ आदि का काव्य रूपांतर कर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम की है। उन्हें शत-शत नमन। इंदौर से पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज के उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह खास रिपोर्ट…
इंदौर। जिनकी लेखन की मूल दृष्टि ही राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सद्भाव, किसी भी नाम पर मनुष्य के नाम भेद के विरुद्ध रही है। ऐसे साहित्यकार बिरले होते हैं। कोटा विज्ञाननगर में रहने वाले बशीर अहमद मयूख एक मात्र मुस्लिम लेखक रहे हैं, जिन्होंने अर्हत जैन आगम के सूक्तों का काव्य रूपांतर किया है। उनका लेखन दर्पण की तरह की साफ-सुथरा रहा। उनका विगत दिनों कोटा में 99वें वर्ष में प्रवेश के बाद देहावसान हो गया, लेकिन उनका रचित साहित्य सदा-सर्वदा सदियों तक जनमानस में आध्यात्म और धर्म आराधना के प्रति चेतना जागृत करता रहेगा। यह मेरा सौभाग्य रहा कि बारां राजस्थान में अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मेलन में इंदौर से वर्ष 2019 में बतौर अतिथि आमंत्रित किया गया था। उस कार्यक्रम में बशीर अहमद मयूख भी विशेष अतिथि और मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद रहे, जहां उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
कई धर्म ग्रंथों को काव्य की धारा में पिरोया
16 अक्टूबर 1926 को दशहरे के दिन जन्मे मयूख ने अपने विद्यार्थी काल में ही 1942 में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। वे कुछ समय राजनीति में भी सक्रिय रहे, लेकिन 1972 में उन्होंने दलगत राजनीति से सन्यास ले लिया। 1942 से कविता और साहित्य सृजन आरंभ किया। देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में वर्ष 1950 से छपना आरंभ हुए। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में स्वर्ण रेखा में ऋग्वेद की ऋचा-मंत्रों का काव्य रूप प्रस्तुत किया। अर्हत में जैन आगम सूक्तों का भी उन्होंने काव्य रूपांतर किया। सूर्यबीज उनका गीत और कविता संग्रह है। ज्योति पथ में वेद, कुरान, गीता, उपनिषद, जैन-बौद्ध आगम सूक्त गुरुग्रंथ आदि काव्य का रूपांतर किया। वहीं गुमशुदा की तलाश में इनके सांस्कृतिक निबंध संग्रह है। अवधू अनहद नाद सुने में आध्यात्मिक-दार्शनिक काव्य संग्रह काफी चर्चित रहा है।
कई सम्मानों से नवाजे गए मयूख
मयूख को कई पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें दशरथमल सिंघवी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, रामेश्वर टांटिया स्मृति पुरस्कार, हरित ऋषि पुरस्कार, राजस्थान श्री, दीनदयाल साहित्यकार पुरस्कार से नवाजे गए। इतना ही नहीं बशीर अहमद मयूख हिन्दी सलाहकार समिति के मानद सदस्य रहे। वे रेल मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, जलसंसाधन मंत्रालय, संस्कृत एवं उर्दू अकादमी राजस्थान, केंद्रीय हिन्दी समिति तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय का भी प्रभार देखते थे। विशेष बात यह है कि इन्होंने अपने कवि सम्मेलनों से प्राप्त पारिश्रमिक से कोटा विज्ञान नगर में मयूखेश्वर महादेव का मंदिर का निर्माण करवाया है। जो आज लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।













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