आचार्य श्री विशद सागर जी ने समर्थ सिटी में स्मृतिनगर से विहार कर पहुंचे। यहां पर जैन समाज के श्रद्धालुओं को संबोधित किया। धर्मसभा में आत्म ज्ञान और आत्म कल्याण के लिए नैतिक मार्ग बताए। मुनिश्री आर्यिका माताजी ने भी संबोधन दिया। इंदौर से पढ़िए यह खबर…
इंदौर। विश्व शांति की बातें करने वाले सभी देशों को यह देखना चाहिए कि क्या उनके देश में शांति है। देश में नहीं तो क्या उनके प्रदेश में शांति है। प्रदेश में नहीं तो कम से कम उनके संभाग, जिले या नगर में शांति है? नगर में नहीं तो कम से कम मोहल्ले में तो शांति है? मोहल्ले को छोड़ो क्या सिर्फ आपके अपने परिवार में शांति है? क्या सिर्फ दोनों पति-पत्नी के बीच शांति है? अरे सबकी छोड़ो और सिर्फ यह देखो कि क्या आप स्वयं पूरी तरह से शांति से जी पा रहे हों? आपका जबाब नहीं में ही होगा। आचार्य श्री ने हमारे जीवन को उपस्थित करते हुए कहा कि विश्व शांति की स्थापना करने के पहले भगवान तीर्थंकरों और ऋषि मुनियों के आत्म शांति के मार्ग को अपनाना पड़ेगा।
जब हर व्यक्ति सिर्फ अपने राग द्वेष स्वार्थ को तिलांजलि देकर आत्म शांति का सच्चा मार्ग अपनाने का थोड़ा सा भी प्रयास करेगा तो विश्व शांति अपने आप स्थापित हो जाएगी। इसी प्रकार हमारे सभी कार्य रूढ़िवादी और झूठे से है। हम मंदिर भी जाते हैं तो पूजा करने नहीं भगवान से मांगने जाते हैं। वहीं हम कहते हैं कि मंदिर में हम भगवान के दर्शन करने जाते परन्तु, जिस दिन आपने भगवान रूपी दर्पण में अपने आत्मा में विराजमान भगवान के दर्शन कर लिए तो आपको मानव जीवन सफल हो जाएगा। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि आचार्य श्री के साथ ही मुनि श्री एवं आर्यिका माताजी ने भी अपना उद्बोधन दिया।
आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज ससंघ (8 पिच्छी) एवं आर्यिका विर्मया श्री, आर्यिका विसंयोजना श्री माता जी ससंघ का मंगल आगमन बुधवार को स्मृति नगर से समर्थ सिटी में हुआ। समाज जनों को आचार्य संघ वैय्यावृत्ति सेवा श्रुसुशा करने का पूर्ण लाभ मिल रहा है। मुनि संघ को आहार दान देने का सौभाग्य आभा दीदी, अनूप गोल्डी भाई, राजीव बंडी, अंशुल जैन, अभिनेष जैन, नीरज जैन एवं पूनम धर्मेंद्र जी परिवार को प्राप्त हुआ।













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