दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाहित होती हैं। यह संक्षिप्तता के साथ गहरे विचारों को व्यक्त करने का एक अद्भुत तरीका है। दोहों का रहस्य कॉलम की 88वीं कड़ी में पढ़ें मंजू अजमेरा का लेख…
कबीर धीरज के धरे, हाथी मन भर खाय।
टूटे एक के कारने, स्वप्न धरे घर जाए॥
कबीरदास जी का यह दोहा जीवन में धैर्य (धीरज) की महत्ता को बहुत सुंदर तरीके से समझाता है। वे कहते हैं कि धैर्यवान व्यक्ति वही है जो जीवन में आने वाले दुख, हानि या संकट के समय भी अपने मन को स्थिर रखता है, जैसे हाथी शांत होकर भरपेट खाता है। वह छोटी-मोटी बातों पर विचलित नहीं होता।
यहां “हाथी मन भर खाय” का तात्पर्य है — सहनशीलता और संतुलन। हाथी बहुत बड़ा और शक्तिशाली होता है, लेकिन खाने के समय वह उतावलेपन या लालच से ग्रस्त नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे शांत भाव से खाता है। इसी तरह जो व्यक्ति धैर्यवान होता है, वह जीवन की परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, उसे विवेकपूर्ण और शांत भाव से स्वीकार करता है।
कबीरदास जी आगे कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति एक छोटी सी िफलता या नुकसान (जैसे एक सपना टूट जाना) के कारण अपना धैर्य खो बैठता है और हार मान लेता है, तो वह व्यक्ति ऐसा है जैसे कोई सपना लेकर युद्ध में गया था और फिर बिना लड़े ही वापस लौट आया। इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति स्थिर नहीं रह पाता, वह जीवन की लड़ाई में कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकता।
कबीरदास जी इस दोहे के माध्यम से हमें यह गूढ़ संदेश देते हैं कि धैर्य ही सफलता और साधना की कुंजी है। जीवन की राह में यदि कोई सपना टूटे, तो उसे अंत नहीं समझो। जैसे हाथी शांत और सधा हुआ होता है, वैसे ही मन को स्थिर रखो। एक असफलता के कारण सब कुछ त्याग देना बुद्धिमानी नहीं है। धैर्य, संतुलन और निरंतरता ही जीवन को सफल बनाते हैं।













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