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मुख्यमंत्री ने घोषणा कर बताया भोपाल में बनेगा आचार्य विद्यासागर का स्मारक: प्रथम समाधि स्मृति दिवस पर विधानसभा में हुआ कार्यक्रम 


आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के देवत्व होने के कई प्रमाण मौजूद हैं। दया, करुणा, प्यार और संयम के साथ नियम करने की उनकी सीख सदियों तक जैन धर्म का मार्गदर्शन करती रहेगी। उनके प्रथम समाधि दिवस पर गुरुवार को भोपाल में मप्र विधानसभा में पहली बार विनयांजलि का कार्यक्रम रखा गया। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत कई दिग्गज राजनेता मौजूद रहे। विधानसभा में मुनिश्री प्रमाण सागर जी से मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आशीर्वाद भी लिया। पढ़िए भोपाल से यह खबर…


भोपाल। यह पहला अवसर है जब मप्र विधानसभा परिसर में किसी जैन संत का प्रथम समािध स्मृति दिवस मनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोपाल में आचार्य विद्यासागर महाराज का स्मारक बनाया जाएगा। सीएम ने मुनि प्रमाण सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन किए। इससे पूर्व दिगंबर जैन मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा रोशनपुरा चौराहा, मालवीय नगर, बिरला मंदिर होते हुए विधानसभा पहुंची। कार्यक्रम में आचार्य विद्यासागर महाराज के जीवन पर आधारित 25 किताबों का विमोचन भी हुआ। जैन समाज के अध्यक्ष ने भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन और मेट्रो स्टेशन का नाम आचार्य विद्यासागर के नाम पर करने की मांग की है। कार्यक्रम में सांसद आलोक शर्मा, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद रहे।

आचार्य विद्यासागर देवता के रूप में विद्यमान 

कार्यक्रम के दौरान सीएम मोहन यादव ने कहा, आचार्य विद्यासागर महाराज के भीतर जो मानव सेवा का भाव रहा है, उसके चलते वो जीते जी देवता के रूप में हम सब के बीच विद्यमान हैं। सीएम यादव ने गोमाता का जिक्र करते हुए कहा कि गोमाता के माध्यम से पूरी प्रकृति बदल सकती है। हम सबके जीवन में संपूर्ण बदलाव भी आ सकता है। गोमाता में वह भाव है, जो अपने बच्चों का ख्याल रखती है और मनुष्य के बच्चों का भी ख्याल रखती है।

आचार्य जी की स्मृति सहेजने के लिए उत्तम स्थान बनेगा 

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आचार्यश्री की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए भोपाल में एक उत्तम स्थान बनाएंगे। आज आचार्य श्री का प्रथम समाधि दिवस है। मुझे वो पुराना दृश्य आंखों के सामने दिखाई दे रहा है, जब महाराज श्री यहां (विधानसभा) पधारे थे। अलौकिक व्यक्तित्व थे। उस वक्त ऐसा लग रहा था कि देवता हमारे बीच आए हैं। हमने आंखों से आमतौर पर मनुष्यों को ही देखा है। देखने में कई बार हमारा दृष्टिदोष हो सकता है लेकिन, कई बार जो होता है वो अलौकिक जीवन धन्य करने वाला होता है। महाराज जी कर्नाटक के हैं लेकिन, ऐसा लगता था कि वो हमारे मध्यप्रदेश और हमारे बीच से ही हैं।

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