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शुभ ऊर्जा के प्रयोग की विधियां जिनालय से प्रारंभ होती हैं-मुनिश्री विनम्र सागर जी महाराजः 15 दिसंबर को रेवती रेंज में होगा शिलान्यास


इंदौर के महावीर जिनालय संगम नगर में मुनिश्री विनम्र सागर महाराज ने प्रवचन में जीवन के हर पहलुओं पर प्रेरक उदबोधन दिया। यहां रेवती रेंज पर 15 दिसंबर को शिलान्यास मुनिश्री के सानिध्य में होगा। पढ़िए इंदौर से यह खबर…


इंदौर। एक साधक है और एक साधु भी है। साधु की ऊर्जा हमेशा एक जैसी नहीं रहती। साधु भी जगह देखकर अपनी ऊर्जा बदलता है। चौके( भोजन शाला) में ऊर्जा का रूपांतरण हो चुका होता है। ध्यान साधना में वह दूसरी ऊर्जा का प्रयोग करता है। कार्य ऊर्जा में अन्य ऊर्जा प्रयोग में आती है और महान उत्सव के समय वह अपनी उर्जा बदलता है। कभी उसकी ऊर्जा उग्र होती है, कभी सौम्य होती है। कभी मृदु होती है और कभी शांत होती है। ऊर्जा के विज्ञान आपकी समझ में नहीं आते हैं फिर भी मैं आपको समझाता हूं। यह विचार मुनिश्री विनम्रसागर जी महाराज ने महावीर जिनालय संगम नगर में अपने प्रवचन के दौरान व्यक्त किए।

अब सारे काम लैपटॉप से हो जाते हैं

मुनि श्री ने कहा कि वैज्ञानिकों ने जब कंप्यूटर का आविष्कार किया तो वह बहुत बड़ा और भारी होता था अब कंप्यूटर का कांपैक्ट रूप आ गया है। मात्र एक लैपटॉप से सभी कार्य हो जाते हैं। माइक्रोवेव में कहीं कोई भी वेव नहीं दिखती लेकिन चीज पककर तैयार हो जाती है।

विद्युत ऊर्जा हरेक की प्राण शक्ति

मुनिश्री ने कहा कि विद्युत ऊर्जा हरेक की प्राण शक्ति है। इसके बिना दुनिया की कोई भी चीज नहीं चलती। विद्युत ऊर्जा दिखाई नहीं देती। करंट भी दिखाई नहीं देता। विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है। अब रेडिएशन वाली चीजें बनने लगी है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज कहते थे कि मैं वैज्ञानिकों और संतों को एक बराबर मानता हूं। साधुओं ने भी साधना की शक्ति का आविष्कार किया है। आध्यात्मिक ऊर्जा में भी बहुत शक्ति होती है। इसमें कुछ ऐसे मंत्र वादी होते हैं जिनका काम हिंसा करना होता है सूक्ष्म ऊर्जा वाले ये बाबा और तांत्रिक मुठ मारकर दूसरों को मार सकते हैं। जिन शासन में शुभ ऊर्जा के प्रयोग की विधियां जिनालय से प्रारंभ होती है।

न्यास का मतलब होता है विश्वास।

शिलान्यास का अर्थ समझाते हुए आपने बताया कि न्यास का मतलब होता है विश्वास। आपने न्यास की कई विधियां बताई। 15 दिसंबर को रेवती रेंज में होने जा रहे शिलान्यास के बारे में कहा कि मैं इसके माध्यम से आपके पाप कर्मों का संहार करना चाहता हूं। सोने और चांदी की शिलाएं शुभ होती हैं।  आप सभी से कहता हूं कि आप सभी एक-एक शिलाएं वहां अवश्य रखें। यहां सभी मांत्रिक अनुष्ठान मेरी निगाह में होंगे।

पाद प्रक्षालन किया और व उतारी आरती

दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि पूरा मुनि संघ लीड एनक्लेव से विहार करके संगम नगर आया था। रास्ते में समाज जनों ने जगह-जगह पर उनके पाद प्रक्षालन किए और आरती उतारी। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंगलाचरण आशा गदिया, सरिता जैन, विजया सेठी आदि ने किया। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन संगम नगर ट्रस्ट के सचिव श्री राकेश सेठी, पारस जैन, अमित सिंघई, कमलेश सिंघई, मनोज जैन, राहुल जैन, वरिष्ठ पत्रकार गौरव शर्मा आदि ने किया। सभी ने मुनि श्री को श्रीफल भी भेंट किए। मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी भी मंच पर मौजूद थे।

यह भी उपस्थित थे

इस अवसर पर प्रेरणा डहाले, नीरजा सेठी, सरला जैन, संगीता जैन, यश जैन, राजेश गंगवाल, आलोक बंडा, रितेश जैन, नवीन सिंघई, सुबोध कासलीवाल, मनीष जैन सहित बहुत अधिक संख्या में समाज जन उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन सतीश जैन ने किया एवं आभार राकेश सेठी ने माना।

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