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गौरव दिगंबर आर्यिकाश्री सृष्टि भूषण माताजी का कल होगा मंगल प्रवेशः दीक्षा के बाद प्रथम बार आ रही हैं माताजी


परम पूज्य 105 आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी एवं आर्यिका श्री विश्वयश मति जी का प्रथम बार बुंदेलखंड के सिद्ध क्षेत्र के लिए प्रभावना पूर्वक विहार चल रहा है। उनके मंगल प्रवेश के लिए मुंगावली दिगंबर जैन समाज ने भव्य तैयारियां की है। पढ़िए मुंगावली  से यह खबर…


मुंगावली। रत्नों, मूंगों की नगरी मुंगावली की कोहिनूर 60 वर्षीय वात्सल्य मूर्ति गणनी परम पूज्य 105 आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी एवं आर्यिका श्री विश्वयश मति जी का प्रथम बार बुंदेलखंड के सिद्ध क्षेत्र के लिए प्रभावना पूर्वक विहार चल रहा है। आपने वर्ष 2024 का चातुर्मास टीकमगढ़ में किया। वहां से बुंदेलखंड यात्रा कर रही हैं। मुंगावली दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष महामंत्री एवं पदाधिकारी ने बताया कि नगर गौरव आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी, आर्यिका श्री विश्वयशमति और क्षुल्लिका श्री आप्तमति 1 दिसंबर को गृह नगर मुंगावली में दीक्षा के 31 वर्ष बाद पहली बार भव्य मंगल प्रवेश होगा। नगर में जगह-जगह जैन समाज के लोग घरों में रोशनी कर रंगोली बना रहे हैं। नगर को माताजी के चित्रों के फ्लेक्स, बैनर कटआउट और स्वागतद्वारों से सजाया गया है।

31 वर्षों से 10 से अधिक राज्यों में किया विहार

23 मार्च 1964 को जन्मी सुलोचना दीदी ने सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेदशिखर जी में आचार्य श्री सुमतिसागर जी और विद्याभूषण आचार्य श्री सम्मतिसागर जी से 26 मार्च 1994 को आर्यिका दीक्षा ली। इसके बाद उनका आर्यिका श्री सृष्टिभूषण जी नामकरण हुआ। 31 वर्ष के संयमी जीवन में 10 से अधिक राज्यांे में भ्रमण कर धर्म की प्रभावना की। आपकी मंगल प्रेरणा से महाव्रती एवं अणु व्रती त्यागियांे के लिए सृष्टि मंगलम संस्था के माध्यम से सिद्ध क्षेत्र सम्मेद शिखर जी, सोनागिर जी अतिशय क्षेत्र महावीर जी, महानगर देहली में शुद्ध आहार की व्यवस्था चल रही है। आदि सृष्टि संस्था के माध्यम से कैंसर मरीजों तथा अन्य बीमारियों के इलाज कराए जाते हैं।

25 हजार किमी का विहार किया

31 वर्ष में माताजी ने 25 हजार से अधिक किलोमीटर का विहार किया है। 29 सितंबर 2019 को विश्व प्रसिद्ध संस्था ने मानव रत्न अलंकरण से देहली में विभूषित किया। आपको अनेक नगरों की समाज द्वारा अनेक उपाधियों से सुशोभित किया गया है। गौरतलब है कि मप्र में जन्मी आर्यिका माताजी का मप्र में पहला संयमी जीवन का 31वां चातुर्मास टीकमगढ़ में हुआ और दीक्षा के बाद 31 वर्षों के बाद प्रथम बार आप नगर प्रवेश कर रही हैं। आप नगर गौरव की अगवानी के लिए संपूर्ण मुंगावली नगरी के अलावा आसपास के अनेक नगर भी काफी उत्साहित है।

सुपार्श्वमति माताजी ने की थी भविष्यवाणी

इस अवसर पर आर्यिका माताजी के गृहस्थ अवस्था के परिजनों के साथ बचपन की सहेलियां भी माताजी के आगमन को लेकर काफी उत्साहित हैं। आर्यिका माताजी से लगभग 18 वर्षों से जुडी श्री विश्व यशमति माता जी ने बताया कि जब माताजी गृहस्थ अवस्था में 4 वर्ष  की उम्र की थी। तब गणनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति माताजी ने यह भविष्यवाणी की थी कि जिस दिन यह बालिका सुलोचना किसी दिगंबर संत को देख लेगी तो यह घर का त्याग कर वैराग्य मार्ग पर आगे अग्रसर होगी और ऐसा ही हुआ कि जब क्षुल्लक अवस्था में आचार्य श्री ज्ञानसागर जी मुंगावली आए तब से सुलोचना  जी  संघ में शामिल हो गई।

दूर-दूर से आएंगे भक्त

माताजी के प्रथम नगर आगमन को लेकर पूरे देश भर से आर्यिका माताजी के हजारों भक्त मुरादाबाद, दिल्ली, कोसी, इंदौर, भोपाल आगरा, राजाखेड़ा, उत्तर प्रदेश आदि अनेक नगरों से आ रहे हैं।

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Shreephal Jain News

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