भारत गौरव राष्ट्र संत आचार्य पुलक सागर जी महाराज ने भट्ठारक यश कीर्ति दिगंबर जैन गुरुकुल में आयोजित ऋषभ कथा एवं महा अर्चना विधान के चौथे दिन कथा वाचन करते हुए कहा कि व्यक्ति को लोकप्रियता लोकप्रिय कार्यों के माध्यम से मिलती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी पद पर बैठने या चालबाजी से प्राप्त की गई लोकप्रियता स्थायी नहीं होती। वास्तव में, लोकप्रियता व्यवहार, वाणी और चरित्र से निर्मित होती है। पढ़िए सचिन गंगावत विशेष रिपोर्ट…
ऋषभदेव। भारत गौरव राष्ट्र संत आचार्य पुलक सागर जी महाराज ने भट्टारक यश कीर्ति दिगंबर जैन गुरुकुल में आयोजित ऋषभ कथा एवं महा अर्चना विधान के चौथे दिन कथा वाचन करते हुए कहा कि व्यक्ति को लोकप्रियता लोकप्रिय कार्यों के माध्यम से मिलती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी पद पर बैठने या चालबाजी से प्राप्त की गई लोकप्रियता स्थायी नहीं होती। वास्तव में, लोकप्रियता व्यवहार, वाणी और चरित्र से निर्मित होती है। आचार्य श्री ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की यश और ख्याति समाप्त हो जाती है, तो उसकी लोकप्रियता भी खत्म हो जाती है। ऐसे व्यक्ति को जीता जागता लाश कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि लोकप्रिय बनना जरूरी है, और इसके लिए संतों की जुबान पर तथा लोगों की होठों पर आपका नाम आना चाहिए। आचार्य जिनसेन, जिन्होंने “ऋषभदेव चारित्र” जैसा महान ग्रंथ लिखा, पहले दिगंबर संत थे जिन्होंने जन्म से लेकर आजीवन दिगंबर रहने का मार्ग अपनाया। उन्होंने श्रृंगार रस का सुंदर वर्णन किया और कहा कि “जिनवाणी मेरी मां है, अरिहंत मेरा पिता है।” एक मां जीवन देती है, जबकि दूसरी मां मोक्ष मार्ग की ओर ले जाती है। उन्होंने ऋषभदेव को न केवल महान पिता का महान पुत्र बताया, बल्कि महान पुत्रों के भी महान पिता कहा। ऋषभदेव कथा जीवन की कथा है, जो हर व्यक्ति के व्यथा का समाधान प्रदान करती है, बशर्ते इसे आत्मसात किया जाए।

चातुर्मास के लिए निवेदन
इस अवसर पर, उदयपुर से राष्ट्रीय पुलक मंच के अध्यक्ष विनोद फंदूओत के नेतृत्व में आए 100 भक्तों ने 2025 के चातुर्मास हेतु श्रीफल भेंट कर निवेदन किया।डूंगरपुर के सकल जैन समाज के अध्यक्ष राजेश डेंडू एवं पुलक मंच ने डूंगरपुर में विहार के लिए निवेदन किया। इससे पूर्व, प्रतिष्ठाचार्य पंडित सुधीर मार्तंड ने आचार्य भक्ति के साथ कथा की शुरुआत के लिए निवेदन किया।
निकाली बारात
समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार जैन ने बताया कि शाम को राजकुमार ऋषभ प्रतीक भाणावत के विवाह की धूमधाम से बारात गुरुकुल के सर्वोत्भद्र महल से निकाली गई। बारात में सैकड़ों बाराती शामिल हुए, जो नाचते-गाते हुए मुख्य बाजार से बड़े मंदिर तक पहुंचे। सभी महिलाओं ने चूंदड़ और पुरुषों ने सफेद वस्त्र और पगड़ी पहन रखी थी। विवाह की रस्मों की तैयारियाँ गांधी के घर पहुंचकर की गईं, जिसमें माता-पिता लीला देवी और रमेश चंद्र कोठारी शामिल रहे।
ये भी रहे मौजूद
इस मौके पर इंद्रानिया समाज के सेठ राज मल कोठारी, अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार जैन, महामंत्री प्रदीप कुमार जैन, उपाध्यक्ष धनपाल भवरा, निर्माण मंत्री नरेंद्र कुमार जैन, धर्म मंत्री मुकेश गांधी, वित्त मंत्री बसंत भवरा, सह मंत्री हेमंत भंवरा, महिला मंडल की अध्यक्षा महालक्ष्मी पंचोली, महामंत्री मंजू भंवरा, नव युवक मंडल अध्यक्ष हितेश भंवरा, महामंत्री अंकुश भाणावत सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित थे।













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