सरस्वती माता को ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी माना जाता है। उनकी आराधना से व्यक्ति के ज्ञान में वृद्धि होती है, जिससे पढ़ाई और रचनात्मक कार्य में सफलता मिलती है। सरस्वती की आराधना से मन की शुद्धता बढ़ती है। एक स्वच्छ मन में अच्छे विचारों का वास होता है, जो सकारात्मकता और शांतिपूर्ण जीवन के लिए आवश्यक है। श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन ने अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज के सरस्वती आराधना के संबंध में विशेष साक्षात्कार किया है। जानिए इस साक्षात्कार में मुनि श्री ने क्या बताया है सरस्वती आराधना का महत्व….
श्रीफल जैन न्यूज: आपके अनुसार किन्हें सरस्वती आराधना विशेष रूप से करनी चाहिए?
मुनि श्री : बच्चों को सरस्वती आराधना करनी चाहिए, जिससे उनका ज्ञान बढ़ता है।
श्रीफल जैन न्यूज : किस प्रकार के बच्चों में सरस्वती का वास नहीं होता?
मुनि श्री : जिन बच्चों के मन में क्रोध और प्रतिस्पर्धा होती है, उनके अंदर सरस्वती का वास नहीं होता।
श्रीफल जैन न्यूज : पढ़ाई करते समय बच्चों को किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
मुनि श्री : पढ़ाई करते समय विचारों की स्वच्छता रखना आवश्यक है।
श्रीफल जैन न्यूज : उदाहरण के माध्यम से इसे समझा सकते हैं क्या?
मुनि श्री : जैसे साफ लकड़ी के पास जाना पसंद होता है, वैसे ही साफ मन वाले बच्चे के पास जाना चाहिए। अगर मन में क्रोध और दूर भावना है, तो सरस्वती का वास कैसे हो सकता है?
श्रीफल जैन न्यूज : प्रतिस्पर्धा की भावना से पढ़ाई करने का क्या प्रभाव है?
मुनि श्री : जो बच्चे प्रतिस्पर्धा की भावना से पढ़ाई करते हैं, वे सरस्वती की आराधना नहीं कर सकते।
श्रीफल जैन न्यूज : बच्चों को सरस्वती से क्या प्रार्थना करनी चाहिए?
मुनि श्री : बच्चों को प्रार्थना करनी चाहिए कि उन्हें इतना ज्ञान मिले कि वे इस ज्ञान से देश की सेवा कर सकें और दूसरों को भी ज्ञान दें।
श्रीफल जैन न्यूज : सरस्वती की आराधना के लिए बच्चों को कौन-कौन सी बातें करनी चाहिए?
मुनि श्री : बच्चों को अपने कमरे की सफाई स्वयं करनी चाहिए, वहां जूते-चप्पल नहीं ले जाना चाहिए, सरस्वती को दीपक लगाना चाहिए, सफेद पुष्प अर्पित करना चाहिए, माता-पिता के चरण स्पर्श करना चाहिए, और ज्ञान को छिपाने के बजाय सबको देना चाहिए।
श्रीफल जैन न्यूज : अनुशासन के बारे में आप क्या कहना चाहते हैं?
मुनि श्री : सरस्वती जी अनुशासनहीनता पसंद नहीं करती और जो बच्चे अपने दोस्तों और शिक्षकों के प्रति प्रेम और विनम्रता से व्यवहार करते हैं, उनके अंदर सरस्वती का प्रवेश होता है।
श्रीफल जैन न्यूज : पढ़ाई के समय दिशा का क्या महत्व है?
मुनि श्री : पढ़ाई करने वाले बच्चों को पश्चिम दिशा में मुख करके पढ़ना चाहिए।
श्रीफल जैन न्यूज : किस मंत्र का जाप करने की सलाह देंगे?
मुनि श्री : मैं बच्चों को “ऊँ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः” और “ऊँ ह्रीं नमः” का जाप करने की सलाह दूंगा।
श्रीफल जैन न्यूज : पढ़ाई के समय भक्तामर स्तोत्र का पाठ करने का क्या महत्व है?
मुनि श्री : भक्तामर स्तोत्र के छः नंबर के काव्य का पाठ प्रतिदिन करना चाहिए और उसका अर्घ्य चढ़ाना चाहिए।













Add Comment