भारत गौरव राष्ट्र संत, राजकीय अतिथि, शांतिदूत आचार्य श्री गुरुदेव पुलक सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 29 सितंबर, रविवार को 27वां राष्ट्रीय महाधिवेशन आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन की भव्यता को लेकर गुरुदेव ने आशीर्वचन दिए। जिनशरणम ट्रस्ट के ट्रस्टी और उदयपुर हिरणमंगरी शाखा के परम संरक्षक, अधिवेशन के मुख्य संयोजक उद्योगपति सुमेश वानावत ने बताया कि 29 तारीख को नगर में एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन होगा। पढ़िए सचिन गंगावत विशेष रिपोर्ट…
ऋषभदेव। भारत गौरव राष्ट्र संत, राजकीय अतिथि, शांतिदूत आचार्य श्री गुरुदेव पुलक सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 29 सितंबर, रविवार को 27वां राष्ट्रीय महाधिवेशन आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन की भव्यता को लेकर गुरुदेव ने आशीर्वचन दिए। जिनशरणम ट्रस्ट के ट्रस्टी और उदयपुर हिरणमंगरी शाखा के परम संरक्षक, अधिवेशन के मुख्य संयोजक उद्योगपति सुमेश वानावत ने बताया कि 29 तारीख को नगर में एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन होगा, जिसकी तैयारी और भव्यता को लेकर मंच की दोनों शाखाओं की बैठक गुरुदेव के निर्देशन में की गई। उल्लेखनीय है कि चातुर्मास का मुख्य कलश स्थापनाकर्ता भी सुमेश वानावत परिवार ही है। इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव ने कहा कि संपूर्ण देश में व्याप्त पुलक मंच परिवार की समस्त शाखाओं का एक अधिवेशन एक मंच महोत्सव 29 तारीख को गुरुदेव की चातुर्मास स्थली केसरियाजी में आयोजित किया जा रहा है।
निरंतर लोगों में उत्साह बढ़ रहा है। पूरे देश की शाखाएं बढ़-चढ़कर इस महोत्सव में हिस्सा ले रही हैं और सभी की सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं। गुरुदेव ने कहा कि इस अधिवेशन में कई व्यवस्थाओं को समय के अनुरूप बदला जाएगा। कई लोग राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थान लेंगे, और कई शाखाओं के पुरस्कारों का भी इंतजार हो रहा है। उन्होंने आने वाले सभी भक्तों, शिष्यों और मंच परिवार को आशीर्वाद दिया कि जितने उत्साह के साथ वे आए हैं, उससे 10 गुना उत्साह के साथ वापस जाएंगे। उन्होंने सभी को रास्ते में कोई बाधा न आने का आशीर्वाद दिया और कहा कि मंगलमय तरीके से आएं और हंसते-खिलखिलाते विदा हों। गुरुदेव ने आगे कहा कि पुलक मंच परिवार अनुशासन, गुरुभक्ति और समर्पण की मिसाल है।
किसी आचार्य के निर्देशन में इतना बड़ा परिवार है, जो महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा के साथ-साथ पूरे देश में फैला हुआ है। गुरुदेव ने कहा कि मैं जहां चतुर्मास कर रहा हूं, वह भगवान ऋषभदेव की नगरी है। शहर छोटा है, लेकिन यहां के लोगों का दिल और व्यवस्थाएं बहुत बड़ी हैं। आवासीय व्यवस्था को लेकर गुरुदेव ने कहा कि एक रात का रेन बसेरा है और सुबह निकल जाना है। अंत में उन्होंने कहा कि गुरुदेव के चरणों में बैठकर इस उत्सव का आनंद लें। इस मौके पर दोनों मंच परिवार के सदस्य उपस्थित थे।













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