अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने संविद नगर, कनाडिया रोड, आदिनाथ जिनालय में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा की भगवान की आराधना के लिए धन की नहीं, बल्कि भक्ति की आवश्यकता है। पैसा भोग के साधन दे सकता है, लेकिन भक्ति हमें परमात्मा बना देती है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने संविद नगर, कनाडिया रोड, आदिनाथ जिनालय में धर्म सभा में भक्तामर के काव्य 5 और 6 पर प्रवचन देते हुए स्पष्ट किया कि भगवान की आराधना के लिए धन की नहीं, बल्कि भक्ति की आवश्यकता है।
पैसा भोग के साधन दे सकता है, लेकिन भक्ति हमें परमात्मा बना देती है। उन्होंने कहा, “मनुष्य या तिर्यंच, यदि वह भक्ति करता है, तो उसमें आत्मशक्ति जाग्रत हो जाती है।
एक शेर, जिसने दो मुनियों के उपदेश को ग्रहण किया, प्रभु भक्ति में लगा और आगे चलकर महावीर बन गया। धन से मान-सम्मान, उच्च पद आदि प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन भक्ति जीवन में अपने आप जन्म नहीं लेती।
भक्ति से पुण्य और पुण्य से शक्ति का जन्म होता है, जो अंतर्मुखी जीव को केवलज्ञान की प्राप्ति में सहायक होती है।”
जैसा करोगे, वैसा भरोगे
उन्होंने आगे कहा कि काव्य पांच के चिंतन से कर्म का नाश होता है। “जैसा करोगे, वैसा भरोगे,” इस सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने पर निश्चित रूप से आंखें भी रोगमुक्त रहेंगी।
भक्ति करने की शक्ति केवल आपकी संगति से ही मिलती है। आपकी प्रतिमा के दर्शन मात्र से सम्यदर्शन की प्राप्ति होती है
इन्हें मिला छठे दिन का लाभ
अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के धर्म प्रभावना रथ के चौथे पड़ाव में 12 दिवसीय वृहद महामंडल विधान के छठे दिन के मुख्य पुण्यार्जक ऋषभ, विमल कोठिया रितेश, सपना, रियांश कोठिया परिवार तिलक नगर और 12 दिवसीय सौधर्म इन्द्र डी.के. मालाजी जैन ने भक्तामर काव्य 21, 22, 23, और 24 की आराधना करते हुए 224 अर्घ्य समर्पित किए।
इस आयोजन में अब तक कुल 1344 अर्घ्य समर्पित किए जा चुके हैं। आयोजन में शान्तिधारा का लाभ आज के मुख्य पुण्यार्जक ऋषभ विमल कोठिया रितेश सपना रियांश कोठिया परिवार तिलक नगर को, दीप प्रज्ज्वलन, चित्रानावरण, और मुनि श्री के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट का लाभ स्वाध्याय महिला मंडल को प्राप्त हुआ।
इन्हें मिला सातवें दिन का लाभ
अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के धर्म प्रभावना रथ के चौथे पड़ाव में 12 दिवसीय वृहद महामंडल विधान के सातवें दिन के मुख्य पुण्यार्जक सुनीता जैन, सचिन, साक्षी, श्रेयांश जैन परिवार, पत्रकार कॉलोनी और 12 दिवसीय सौधर्म इन्द्र डी.के. मालाजी जैन ने भक्तामर काव्य 25, 26, 27, और 28 की आराधना करते हुए 224 अर्घ्य समर्पित किए।
इस आयोजन में अब तक कुल 1568 अर्घ्य समर्पित किए जा चुके हैं।
आयोजन में शान्तिधारा का लाभ आज के मुख्य पुण्यार्जक सुनीता जैन, सचिन, साक्षी, श्रेयांश जैन परिवार, पत्रकार कॉलोनी को, दीप प्रज्वलन, चित्रानावरण, और मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का आज के पुण्यार्जक व प्रदीप जैन और शास्त्र भेंट का लाभ अंजलि जैन और कनक लुहाड़िया को प्राप्त हुआ।














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