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पर्युषण के दूसरे दिन की गई उत्तम मार्दव धर्म की आराधना : अभिमान को छोड़ सबसे विनय भाव से पेश आएं- आर्यिका सरस्वती माताजी


दिगंबर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का दिन दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म का होता है। अकसर धन, दौलत, शान और शौकत इन्सान को अहंकारी और अभिमानी बना देता है, ऐसा व्यक्ति दूसरों को छोटा और अपने आप को सर्वोच्च मानता है। मंदिर जी में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी ने प्रवचन देते हुए उक्त बातें कहीं। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…


सनावद। दिगंबर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का दिन दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म का होता है। अकसर धन, दौलत, शान और शौकत इन्सान को अहंकारी और अभिमानी बना देता है, ऐसा व्यक्ति दूसरों को छोटा और अपने आप को सर्वोच्च मानता है।ये सभी चीजें नाशवान हैं। ये सभी चीजें एक दिन आप को छोड़ देंगी या फिर आपको एक दिन मजबूरन इन चीजों को छोड़ना ही पडे़गा। मंदिर जी में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी ने प्रवचन देते हुए उक्त बातें कहीं। इससे पहले प्रातः संत निलय व बड़ा मंदिर जी में समाजजनों ने भक्ति भाव से पंचामृत अभिषेक व सामूहिक पूजन किया गया। शांति धारा करने का सौभाग्य परीन अशोक कुमार पंचोलिया परिवार को मिला।

आर्यिका माताजी ने कहा कि नाशवंत चीजों के पीछे भागने से बेहतर है कि अभिमान और परिग्रह को छोड़ा जाये और सभी से विनम्र भाव से पेश आएं। सभी जीवों के प्रति मैत्री-भाव रखें, क्योंकि सभी जीवों को अपना जीवन जीने का अधिकार है। सभी को एक न एक दिन जाना ही है, तो फिर यह सब परिग्रहों का त्याग करें और बेहतर है कि खुद को पहचानें और परिग्रहों का नाश करने के लिए खुद को तप, त्याग के साथ साधना रूपी भट्टी में झोंक दें क्योंकि इनसे बचने का और परमशांति व मोक्ष को पाने का साधना ही एकमात्र विकल्प है।

इसी कड़ी में दोपहर में आर्यिका माता जी के द्वारा जिनवाणी पूजन करवाया गया, जिसका सौभाग्य सपना राजा जैन बडूद परिवार को प्राप्त हुआ। साथ तत्वार्थ सुत्र का अध्यन माताजी के द्वारा कार्य गया। शाम को गुरु भक्ति आर्यिका संघ के मंगल प्रवचन व रात्रि में आरती भक्ति कर भजन प्रस्तुत किए गए एवम प्रश्न मंच किया गया। व प्रतियोगिता आयोजित की गई।

इस अवसर पर सभी समाजजनों अपनी सहभागिता दर्ज करवाई।

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