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 आर्यिका सरस्वती माता जी का रहा सानिध्य : चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांति सागर जी महाराज का समाधि दिवस  मनाया गया


प्रथम आचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का समाधि दिवस नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माता जी के सानिध्य में मनाया गया। सन्मति जैन काका ने बताया कि इस अवसर  पर आर्यिका माताजी के सानिध्य में प्रातः श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिरजी में श्री जी का भव्य पंचामृत अभिषेक एवं आचार्य शांति सागर विधान की रचनाकर 36 अर्घ्य समर्पित कर पूजन किया गया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


सनावद। 20 वीं सदी के प्रथम आचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का समाधि दिवस नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माता जी के सानिध्य में मनाया गया। सन्मति जैन काका ने बताया कि इस अवसर  पर आर्यिका माताजी के सानिध्य में प्रातः श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिरजी में श्री जी का भव्य पंचामृत अभिषेक एवं आचार्य शांति सागर विधान की रचनाकर 36 अर्घ्य समर्पित कर पूजन किया गया।

इस अवसर पर आर्यिका अनंत मति माता जी ने अपनी वाणी से रसपान करवाते हुए कहा कि श्रमण परम्परा के आदर्श संत आचार्य शान्ति सागरजी महाराज का जन्म विक्रम संवत 1926 (सन् 1872) के आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष 6 तिथि, बुधवार को दक्षिण भारत के बेलगांव जिले के अंतर्गत येलगुल ग्राम में हुआ था। आपका विवाह 9 वर्ष की अल्प आयु में कर दिया गया था। विवाह के 6 माह उपरांत ही उस बालिका का स्वर्गवास हो गया। पुन: विवाह का प्रसंग उठने पर आपने अपने घर वालों को स्पष्ट मना कर दिया और आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेने का प्रस्ताव रख दिया और अन्त में उन्होंने गृह त्याग कर दिया और दीक्षा ले ली।

आपने अपने 35 वर्ष की साधनाकाल के अन्तर्गत नौ हजार छ: सो अड़तीस उपवास किए। आपका सारा जीवन घोर तपस्या और संघर्ष में बीता। आपके आचरण में अहिंसा थी, वाणी में स्याद्वाद और चिन्तन में अनेकान्त था। आपने अपने जीवन का अन्त समय निकट जानकर श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंथलगिरिजी (महाराष्ट्र) में 1अगस्त, रविवार को समाधि मरण (सल्लेखना) का निश्चय किया और 18 सितम्बर 1955 को प्रातः 6.50 पर ॐ सिद्धोऽहं का ध्यान करते हुए युगप्रवर्तक आचार्यं श्री शान्तिसागर जी ने नश्वर देह का त्याग कर दिया। संयम-पथ पर कदम रखते ही आपके जीवन में अनके उपसर्ग आये जिन्हें समता पूर्वक सहन करते हुए आपने शान्तिसागर नाम को सार्थक किया।

इस अवसर पर सभी समाज जनों बड़ी भक्ति भाव से 20 वीं सदी के प्रथम आचार्य आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज को अपनी विनयांजलि समर्पित की।इस अवसर पर प्रियांशी जैन, निधि झांझरी, अंशुमा जैन, प्रीति जटाले, संध्या जैन,अंजू पाटनी, संगीता बाकलीवाल,अप्सरा जटाले, हीरामणी भूच, मंदा भुंच, लविश पाटनी, हेमंत काका,अ चिंत्य जैन, सुरेश मुंशी, सुनील पांवणा, सुरेश मुंशी, कमल केके, अशोक पंचोलिया, अरविंद जैन, संयम जटाले,अजय पंचोलिया उपस्थित थे।

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