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धर्मसभा में दिए प्रवचन : आचरण पूज्य है, अकेला ज्ञान पूज्य नहीं है-सुनयमति माताजी


आर्यिका सुनयमति माताजी ससंघ मल्हारगंज में विराजमान हैं। आर्यिका माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि चरणानुयोग ग्रंथ सबसे कठिन है क्योंकि इसमें चलना पड़ता है। पढ़िए यह रिपोर्ट…


इंदौर। परम पूज्य आचार्य श्री सुंदर सागर जी की परम शिष्या आर्यिका सुनयमति माताजी ससंघ मल्हारगंज में विराजमान हैं। आर्यिका माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि चरणानुयोग ग्रंथ सबसे कठिन है क्योंकि इसमें चलना पड़ता है। आज पूरे भारत में सबसे कठिन आचरण किसका है दिगम्बर साधु का है, इसको पालन करने वाले कितने हैं बस 1000 से 1500। पूरी जिंदगी इन 28 मूलगुणों को पालना पड़ता है, चाहे आपके प्राण चले जाएं पर 28 मूलगुण छूटना नहीं चाहिए, ऐसा संकल्प एक साधु का होता है।

और साधु सबसे कम हैं इससे यह सिद्ध होता हैं कि चरणानुयोग सबसे कठिन है। अगर एक श्रावक सबसे मूल 8 मूलगुण का पालन करे, समयक्तव चारित्र का आचरण तथा पालन करे और अंत में समाधि मरण करेगा तो वह जीव स्वर्ग में जाएगा। आचरण करेंगे तो आपकी गति सुधर जाएगी और बिना आचरण करे गति कभी सुधरती नही हैं। चरणानुयोग सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर महत्वपूर्ण नहीं होता तो हम ऊपर क्यों बैठे हैं और आप नीचे।

क्यों बैठे हैं इसलिए आचरण पूज्य है अकेला ज्ञान पूज्य नहीं है और यदि आचरण के साथ ज्ञान है तो सोने पर सुहागा। जो साधु प्रवचन नहीं कर पाते, स्वाध्याय भी बोल कर नहीं कर पाते फिर भी आप उनके पास जाओगे तो उनके चरण स्पर्श करोगे क्यों? क्योंकि वो 28 मूलगुण का पालन करते हैं तो अपने जिनागम में आचरण की पूज्यता है।

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Shreephal Jain News

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