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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का गुणानुवाद सभा में सुनाए संस्मरण : त्रिदिवसीय 35वां आचार्य पदारोहण समारोह शुरू 


पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 48 साधु सहित बाहुबली कॉलोनी बांसवाड़ा में विराजित हैं। 5 जुलाई से 7 जुलाई तक आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 35वां आचार्य पदारोहण दिवस उत्साह भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। 5 जुलाई को प्रातः काल श्री जी के पंचामृत अभिषेक शांतिधारा पूजन के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का गुणानुवाद सभा में आर्यिका श्री निर्णयमति, आर्यिका श्री प्रमोदमति, आर्यिका श्री विलोकमति ,मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी,मुनि श्री पुण्य सागर जी ने गुरु के उपकार गुणों वात्सल्य आदि अनेक गुणों का विवेचन भाव विभोर होकर किया। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…


बांसवाड़ा। पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 48 साधु सहित बाहुबली कॉलोनी बांसवाड़ा में विराजित हैं। 5 जुलाई से 7 जुलाई तक आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 35वां आचार्य पदारोहण दिवस उत्साह भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। 5 जुलाई को प्रातः काल श्री जी के पंचामृत अभिषेक शांतिधारा पूजन के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का गुणानुवाद सभा में आर्यिका श्री निर्णयमति, आर्यिका श्री प्रमोदमति, आर्यिका श्री विलोकमति ,मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी,मुनि श्री पुण्य सागर जी ने गुरु के उपकार गुणों वात्सल्य आदि अनेक गुणों का विवेचन भाव विभोर होकर किया।

दोपहर को श्री शांति विधान की पूजन आचार्य संघ सानिध्य में पुण्यार्जक परिवारों द्वारा की गई। शाम को श्री जी और आचार्य श्री की आरती पश्चात भजन संध्या हुई। समाज अध्यक्ष महेंद्र वोरा, समाज प्रवक्ता महेंद्र कवलिया कमल सगरीय अनुसार आर्यिका श्री निर्णय मति जी ने गुरु आचार्य वर्धमान सागर जी में परमात्मा का गुण और रूप बताया। गुरु दीपक, चंदन, पारस मणि और दर्पण समान होते हैं। आर्यिका श्री प्रमोदमति माताजी ने बताया कि आचार्य श्री ने बचपन के जन्म मरण,संयोग वियोग, सुख दुःख का चिंतन करते थे सनावद में अनेक साधुओं के समागम से वैराग्य पुष्ट होता गया।

अनेक संस्मरण बताए कि त्यागी संयमी की अनुमोदना रक्षा देवता भी करते हैं। आर्यिका श्री विलोक मति जी ने अनेक संस्मरण में बताया कि दीपावली पर दीप का, बसंत ऋतु में फुल का साधुओं आचार्यों में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का महत्व है। गुरु का आदेश नहीं मानने पर क्षति होती हैं क्षपक साधु की समाधि अच्छे से आचार्य श्री कराते हैं। मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी ने कोहिनूर के समान, विश्व में यश फैलाने वाले यशवंत जी का गुणगान किया। मुनि श्री पुण्य सागर जी ने गुणानुवाद में गुरु को छाते बस्ते के समान चारित्र और ज्ञान के गुण बताए।

गुरु का गुणानुवाद पुण्य से प्राप्त होता है। देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री भी 35 वर्षों से उसी पद पर नहीं हैं, आपको आचार्य पद पर 35 वर्ष हो गए। गज्जू भैया, राजेश पंचोलिया अनुसार 6 जुलाई को अभिषेक शांति धारा विनयांजलि सभा के बाद दोपहर को वर्धमान सागर मंडल विधान की पूजन ओर रात्रि में आचार्य श्री की गौरव गाथा का मंचन होगा।

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