समाचार

गिरारगिरी की धसान नदी में 565 वर्ष प्राचीन तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान की जैन प्रतिमा मिली

bhagwan jain ki pratima
bhagwan jain ki pratima

गिरारगिरी जी में दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़े पुरातत्व विदों ने 14-15वी शताब्दी की मूर्ति बताया

ललितपुर। मड़ावरा विकासखंड में धसान नदी के समीप श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र स्थित है। धसान नदी से 565 वर्ष प्राचीन तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान की प्राचीन अति महत्वपूर्ण जैन प्रतिमा मिली है।

गिरार क्षेत्र के मीडिया प्रभारी डॉ सुनील संचय ने बताया की गिरार गिरी में राजकुमार चरबाहा प्रतिदिन बकरी चराने के लिए धसान नदी पर जाता था, वह प्रतिदिन की भांति अपनी बकरियां चरा रहा था, इसी दौरान उसे नदी में कुछ दिखाई दिया, उसने उसे निकाला तो उसे जैन प्रतिमा मिली।

कमेटी महामंत्री अभिषेक जैन मड़ावरा और संयुक्त मंत्री प्रदीप जैन मड़ावरा ने बताया कि चरवाहे ने समाज के प्रमुखजन एवं गिरार कमेटी के पदाधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी और बताया कि उसे नदी में प्रतिमा प्राप्त हुई है। इसके बाद उसने बरायठा, मडावरा, गिरार की समाज के मध्य अतिशय क्षेत्र गिरार कमेटी वालों के लिए प्रतिमा को सौंप दिया। गिरार थाने में भी इसकी सूचना दर्ज करा दी गई है। प्रतिमा पीतल की धातु की है और लगभग 9 इंची लंबाई है। मूर्ति के पीछे एक प्रशस्ति भी अंकित है जिसमें स्पष्ट लिखा है कि यह शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा है। प्रतिमा जी दर्शन हेतु मंदिर जी में रखी गई है। इस दौरान अभिषेक जैन, प्रदीप जैन, त्रिलोक जैन, आशीष जैन अजित जैन स्टील मड़ावरा, मुकेश जैन, चक्रेश जैन, गजेंद्र जैन, दीपचंद्र जैन आदि प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

श्री 1008 शांतिनाथ भगवान की मूर्ति धसान नदी से प्राप्त होने की सूचना प्राप्त होने पर अतिशय क्षेत्र गिरार गिरी जी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का दर्शन के लिए तांता लगा हुआ है।

फोन एवं सोशल मीडिया पर अनेक विद्वानों ने मूर्ति की प्राचीनता पर अपनी प्रतिक्रिया दी है जिनमें प्रमुख हैं पुरातत्व प्रेमी शैलेन्द्र जैन लखनऊ, वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन जयपुर, प्रदमुन शास्त्री जयपुर, नीरज शास्त्री बरायठा, सचिन जैन बड़ौत, संजय जैन जैन विश्व संगठन दिल्ली, अजित जैन, डॉ महेन्द्र मनुज इंदौर, गौरव जैन, राजस्थान,अखिलेश जैन आदि प्रमुख हैं। शिलालेख विशेषज्ञ नवनीत मुरैना का कहना है कि प्रशस्ति पर संवत 1513, वै. शु.5, शांतिनाथ बिम्ब अंकित है।

इनका कहना है…

मूर्ति के पीछे अंकित प्रशस्ति से स्पष्ट है कि प्रतिमा जैन तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान की है। प्रशस्ति पर उल्लेखित लिपि 14-15 शताब्दी की है। पुरातत्व की दृष्टि से मूर्ति महत्वपूर्ण है इस पर अनुसंधान की आवश्यकता है। -प्रोफेसर भागचन्द्र भास्कर नागपुर (राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित, जैन मूर्ति विज्ञान व पुरातत्व के जानकार वरिष्ठ विद्वान)

ऐतिहासिकता की दृष्टि से मूर्ति को संग्रहालय में संग्रहित करना चाहिए, मूर्ति के अंगोपांग सुव्यवस्थित न होने से पूजनीय नहीं है।- ब्र. जय निशांत भैया ( जैन प्रतिमाओं के सुप्रसिद्ध प्रतिष्ठाचार्य एवं निर्देशक प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़)

  • धसान नदी गिरार से प्राप्त मूर्ति के साथ प्राप्त प्रशस्ति पर संवत् 1512 अंकित है अर्थात ईसवी सन 1455 (A.D.) की भगवान शांतिनाथ की मूर्ति है जो 565 वर्ष प्राचीन है। मूर्ति अतिशय क्षेत्र गिरार जी में विराजित है। मूर्ति के सम्पूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों पर शोध जरूरी है। -डॉ. सुनील संचय, ललितपुर, मंत्री उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड तीर्थक्षेत्र कमेटी
आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
संपादक

About the author

संपादक

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page