प्रथमाचार्य चरित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागरजी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी, पट्ट परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजितसागरजी के शिष्य मुनि ,नगर गौरव वात्सल्यमूर्ति 108 श्री पुण्यसागरजी का 19 वर्षो बाद 19 शिष्यों सहित मंगल प्रवेश हुआ। गुरुदेव के मंगल प्रवेश में जहाँ दिगम्बर संघ एक जैसी वेशभूषा में था वही जेनेत्तर समाज ने भी थांदला के नन्दन का अभूतपूर्व नगर प्रवेश कराया। 3 माह में 1200 किमी चलकर मुनि श्री पुण्यसागर ने थांदला में अभूतपूर्व आगमन किया । पढि़ए जीवन लाल जैन की रिपोर्ट ……
थांदला। प्रथमाचार्य चरित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागरजी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी, पट्ट परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजितसागरजी के शिष्य मुनि ,नगर गौरव वात्सल्यमूर्ति 108 श्री पुण्यसागरजी का 19 वर्षो बाद 19 शिष्यों सहित मंगल प्रवेश हुआ। गुरुदेव के मंगल प्रवेश में जहाँ दिगम्बर संघ एक जैसी वेशभूषा में था वही जेनेत्तर समाज ने भी थांदला के नन्दन का अभूतपूर्व नगर प्रवेश कराया। बैंड-बाजों पर मधुर गीत, कलश लेकर चलती महिलाएं । कुछ महिलाओं ने बैंड भी बजा रही थी ।नन्हें नन्हें हाथों में धर्म ध्वजा व बैंड, पारंपरिक ढोल ताशों के साथ ग्रामीण दल,गुरुदेव का जयकारा करता हुआ विशाल जन समूह गुरुदेव के मंगल प्रवेश की शोभा बढ़ा रहा था। अनेक स्थानों पर महानुभावों ने गुरुदेव का पाद प्रक्षालन किया व पुष्प वर्षा की तो गुरुदेव का अंतर्मन अभिभूत हो गया। पूरा करवां नगर के मुख्य चौराहे से होता हुआ नयापुरा पहुँचा और धर्म सभा में परिवर्तित हो गया ।जहाँ क्षुल्लक पूर्णसागरजी महाराज की जैनेश्वरी दीक्षा समारोह भी आयोजित हुआ। कार्यक्रम का मंगलाचरण संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी वीणादीदी ने किया वही थांदला अध्यक्ष अरुण कोठारी व संघ के मुख्य पदाधिकारियों ने आगंतुक महानुभावों का स्वागत किया।
दीक्षा का अर्थ है इच्छाओं का दमन
आयोजन में भगवान श्री महावीरस्वामी तथा प्रथमाचार्य चरित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागरजी एवं पूर्वाचार्यो को विभिन्न नगरों से पधारे समाज द्वारा अर्ध्य समर्पित किया गया। वही सौभाग्यशाली परिवार की 7 महिलाओं द्वारा चौक पूरण की क्रिया की गई। मुनि श्री का प्रवचन हुआ । जिसमें उन्होंनें थांदला से निकलते हुए अपने संयमी जीवन यात्रा के दौरान पूरे देश की स्पर्शना के स्मरण सुनाए।मुनिश्री ने कहा कि 3 माह में 1200 किमी की है ।यह यात्रा आचार्य श्री वर्धमानसागरजी के दर्शन करने के साथ पूर्ण होगी। जिसका हम बहुत दिनों से इंतज़ार कर रहे है, यही कारण है कि इस दौरान हमने कही विराम नही लिया। इस बेला में मुनि श्री के द्वारा दीक्षार्थी क्षुल्लक पूर्णसागरजी के वस्त्र परित्याग के पश्चात पंच मुष्ठी केशलोच करते हुए दीक्षा संस्कार मस्तक तथा हाथों पर कर दीक्षा प्रदान करते हुए क्षुल्लक से मुनि ने पूर्वोक्त नामकरण किया। दीक्षा का अर्थ है इच्छाओं का दमन, दीक्षा याने लंच और मंच का बदल जाना,दीक्षा मतलब ड्रेस और एड्रेस का परिवर्तन हो जाना,विचारों में क्रांति और आमूलचूल परिवर्तन को दीक्षा कहते हैं। आपने नगर से हुई 50 दीक्षित आत्माओं का जिक्र करते हुए कहा कि जैनियों की दीक्षा राग द्वेष निवृत्ति के लिए होती है, दीक्षा पूर्व संस्कार को तोड़ने का नाम है।
दीक्षा संसार से मुख मोड़ कर अंतर्मुखी दृष्टि हो जाने को कहते हैं, अलौकिकता से दूर ,आध्यात्मिक नगर के नजदीक रहना दीक्षा है।पुण्यार्जक परिवार द्वारा नवः दीक्षित को संयम उपकरण भेंट किये गए। कार्यक्रम का सुंदर एव प्रभावशाली संचालन वीणा दीदी ने किया। नगर में यह पहला अवसर है जब नगर के ही रत्न की भव्य दीक्षा का नजारा ,हर किसी को भाव व आंनद विभोर कर गया। इस दौरान स्थानीय बालिका मण्डल व महिला मंडल ने सुंदर प्रस्तुतियां दी, व बाहर से आये संगीतकारों ने एक से बढ़कर एक गुरुदेव व वैराग्यमय भजनों से वातावरण का आनंदित कर दिया। आयोजन में बाल ब्रम्हचारिणी वीणा दीदी व थांदला के युवा ब्रम्ह्चारी विकास भैया का उनकी अनुत्तर सेवाओं के लिए विशेष सम्मान किया गया। वही दिगम्बर हूमड़ समाज अध्यक्ष दिनेशकुमार खोड़निया, कमल कुमार गंगवाल, भागचंद चूड़ीवाल, विजय कुमार चूड़ीवाल, नरेंद्र कुमार पाटनी, सुधीर कुमार सेठी, प्रवीण कुमार चूड़ीवाल, सुरेश कुमार कासलीवाल, अशोक कुमार छाबड़ा, अजित कुमार छाबड़ा गुवाहाटी (असम) आदि अनेक स्थानों से आकर गुरुदेव के पाद प्रक्षालन, दीक्षार्थी के माता-पिता, पीछी आदि धमोपकरण देने का लाभ लेने वालें लाभार्थी परिवारों का थांदला संघ अध्यक्ष अरुण कोठारी, पारस मेहता, इन्द्रवर्धन मेहता, विजय भिमावत, अनूप मिंडा, संदेश बोबड़ा, संजय कोठारी आदि ने शाल एवं माला पहनाकर बहुमान किया। इस दौरान थांदला नगर के सभी समाज के प्रतिनिधि, समाजसेवी, भाजपा व कांग्रेस आदि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।सकल आयोजन में प्रशासनिक व्यवथा सुचारू रूप से बनी रही। अंत में लाभार्थी उषादेवी प्रकाशचंद्र मेहता परिवार ने समस्त महानुभावों का आभार व्यक्त किया। धर्म सभा में संघजनों ने गुरुदेव के चातुर्मास की भावभरी विनती प्रस्तुत की। नन्दनवन धरियावद से पधारें शिंतासुरि प्रतिष्ठाचार्य पंडित हँसमुख जैन ने गुरुदेव की विहार चर्या व जिन शासन के प्रति अप्रमत्त साधना व समर्पण का मंत्रमुग्ध उच्चारण किया ।वही आयोजन में पधारें अतिथियों के साथ संचालिका वीणा दीदी,व विकास भैया से संघ सेवा की भावना से परिचय करवाते हुए धर्म सभा की सफलता के लिए नवयुवक मंडल सहित सकल संघ को धन्यवाद दिया।













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