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भजन करने से बढ़ती है प्रेम-भावना और सह्रदयता  परमात्मा से समीपता का अहसास कराता हैं भजन 


श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर परेड अम्बाह में जैन साध्वी विश्रेय श्री माता जी के सानिध्य में भजन संध्या का आयोजन किया गया।जिसमें बालक- बालिकाओं ने भाग लेकर भजन के माध्यम से भगवान की स्तुति की। इस मौके पर सभी प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट …


अम्बाह।श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर परेड अम्बाह में जैन साध्वी विश्रेय श्री माता जी के सानिध्य में भजन संध्या का आयोजन किया गया।जिसमें बालक- बालिकाओं ने भाग लेकर भजन के माध्यम से भगवान की स्तुति की। इस मौके पर सभी प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया। समाजसेवी अमित जैन टकसारी ने कहा कि भजन-करना सबसे सर्वश्रेष्ठ इसलिए माना गया है, क्योंकि भजन करते समय परमात्मा से समीपता का एहसास भक्त को होता है ,जब भी भक्त भजन में तन्मयता से रमता है ,तब उसके मन के भाव निश्छलता से भर जाते है, और मन से नकरात्मक भाव दूर होते जाते हैं। टकसारी ने कहा कि भजन करने से ह्रदय में प्रेम-भावना और सह्रदयता तो बढ़ती ही है, साथ-साथ ही भजन करने से वाणी में मधुरता भी आती है।

औषधि की तरह है भजन गायन

जब भजन सुर और राग के साथ गाया जाता है, तो ये मन के तनाव और चिंता को दूर कर देता है। मन के भाव गीत-संगीत के साथ घुल जाते हैं। भगवान को याद करते हुए जब भजन किया जाता है, तो वह मन के साथ मस्तिष्क में भी सकारात्मक ऊर्जा को भरता है। भजन गायन औषधि की तरह से भी शरीर पर काम करता है। ये शरीर के कई रोगों को दूर करता है, और शरीर को आत्मबल और शक्ति देता है। जैन ने बताया कि भजन कोई बौद्धिक योग नहीं है ,लेकिन इसकी तरंगे जब मन की गहराई में उतरती हैं तो ये शरीर में रोग को दूर करने का काम भी करता है।वहीं आयोजन में जैन साध्वी के लिए बनने वाले शुद्ध आहार निर्माण एवं अन्य आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली बालक- बालिकाओं सहित महिलाओं का सम्मान भी किया गया।

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