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अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद का सप्तम राष्ट्रीय अधिवेशन का हुआ आयोजन: ज्योतिष विषय को गहराई से समझकर ही करे फलादेश 


अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद का सप्तम राष्ट्रीय अधिवेशन सलूम्बर राजस्थान में 31 मार्च को अनेकांत कॉलेज की तरफ से आयोजित किया गया इस मे दिल्ली,बड़ौत, उज्जैन,उदयपुर,ग्वालियर, भोपाल,जयपुर, कर्नाटक मुरादाबाद, छिंदवाड़ा ,सलूम्बर सहित देश के अनेक शहरों से प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्यो ने भाग लिया। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट …….


सलूंबर।अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद का सप्तम राष्ट्रीय अधिवेशन सलूम्बर राजस्थान में 31 मार्च को अनेकांत कॉलेज की तरफ से आयोजित किया गया इस मे दिल्ली,बड़ौत, उज्जैन,उदयपुर,ग्वालियर, भोपाल,जयपुर, कर्नाटक मुरादाबाद, छिंदवाड़ा ,सलूम्बर सहित देश के अनेक शहरों से प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्यो ने भाग लिया उज्जैन से आये डॉ जयेंद्र कीर्ति जी ने अपने आलेख में कहा ज्योतिष विषय को गहराई से समझकर फलादेश करना चाहिए।अध्यक्षता कर रहे रवि जैन गुरु जी दिल्ली ने कहा हमे जन जन तक आज की आवश्यकता को देखकर अपने परिस्थिति के अनुसार सूत्र तय करने होंगे।पंडित सुनील भंडारी ने मांगलिक पत्रिका का नक्षत्रों द्वारा परिहार बताया

सर्वतोभद्र चक्र और ध्रुवांक सारणी देती है सटीक परिणाम

ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने ज्योतिष द्वारा ,राशि,नक्षत्रो पर ग्रहों के संचार से व्यापारिक वस्तुओं की तेजी मंदी पर अपना आलेख बाचन करते हुए बताया कि ग्रहों में अकेले बुध की चाल बुध का उदय,अस्त होने,वक्री मार्गी होना अन्य ग्रहों से युति करने का तेजी मंदी पर प्रभाव होता हैं इसके अलावा सूर्य सक्रांति,पंचक,वार ,चंद्र दर्शन,चंद्रमा की श्रृंग की ऊँचाई झुकाव, ग्रहणों का प्रभाव से तेजी मंदी आती हैं इसे निकालने की इन अनेक विधियो के अलावा सर्वतोभद्र चक्र और ध्रुवांक सारणी विशेष सटीक परिणाम देती हैं। इस अवसर पर ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन को सम्मानित किया गया

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