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प्रभु की अर्चना से ही होता आत्मकल्याण - आर्यका 105 विभाश्री माताजी  सिद्धचक्र महामंडल विधान में धार्मिक आयोजन और प्रवचन से भक्तिमय हुआ माहौल  


तीर्थ का राजा श्री सम्मेद शिखर सिद्धक्षेत्र में सिद्धचक्र महामंडल विधान में परम पूज्य आर्यका 105 विभाश्री माताजी का मंगल आशीर्वाद मिला। 17 से 25 मार्च तक चलने वाले विधान के दौरान हर दिन अनेक धार्मिक आयोजन और प्रवचन चल रहे हैं। पढि़ए राज कुमार अजमेरा की रिपोर्ट… 


सम्मेद शिखरजी। जीवन में बिना कारण के कोई कार्य नहीं होता है। जीवन में यदि गरीबी है तो उसका कारण है। यदि अमीरी है तो भी उसका कोई कारण होता है। सुख और दुख का भी कोई कारण होता है। जीवन में सुख-दुख, धूप-छांव की तरह आते-जाते हैं, इसी का नाम संसार है। यह बात सिद्धचक्र महामंडल विधान के अवसर धार्मिक आयोजन एवं प्रवचन में कही गई। गौरतलब है कि 17 से 25 मार्च तक चलने वाले विधान के दौरान हर दिन अनेक धार्मिक आयोजन और प्रवचन चल रहे हैं। जीवन के सभी दिन एक से नहीं होते हैं। जिस तरह दिन के बाद रात आती है। इसी तरह सुख-दुख आते-जाते हैं। जीवन में प्रभु की कृपा के बिना व्यक्ति सुखी नहीं रह सकता। इसलिए प्रभु वंदना जरूरी है। जीवन में सुख-शांति और आत्म कल्याण के लिए प्रभु की अर्चना करना चाहिए। सिद्धचक्र महामंडल विधान में अनंतानंत सिद्ध भगवानों की महाअर्चना की जाती है। इससे महान अतिशय पुण्य का अर्जन होता है। ऐसे प्रभु की महाअर्चना करने को देव भी तरसते हैं।

ये विचार श्री सिद्धचक्र विधान के तीसरे दिन सम्मेद शिखरजी में संघ सहित विराजमान गणिनी आर्यिका 105 विभाश्री माता जी विधान में विशेष आशीर्वाद देते हुए अपने प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रावकों से कही। आयोजन प्रात: 6.00 बजे से अभिषेक और शन्तिधारा दिग्विजय-धनंजय छाबडा दिल्ली को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही पूजन प्रारम्भ हुआ। विधान के तीसरे दिन मण्डल में सिद्धों के बत्तीस अघ्र्य समर्पित किए गए। सन्ध्या आरती का सौभाग्य सोधर्म इन्द्र अरुण-संतोष, धनंजय छाबड़ा सहित लालगोला परिवार को प्राप्त हुआ। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम बहन-बेटी के द्वारा किया गया।

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