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दूसरों को पीड़ा दुख देने से व्यक्ति खुद भी दुखी होता है-मुनि श्री प्रणीत सागर : वैशाली नगर महावीर जिनालय में हुई धर्म सभा 


दूसरो को पीड़ा दुख देने से व्यक्ति खुद भी दुखी होता है, वह मनुष्य इन कार्यों के करने के अनंतर अथवा मरने के बाद शोक को प्राप्त होता है। यह मंगल देशना आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रणीत सागर जी ने वैशाली नगर महावीर जिनालय में आयोजित धर्म सभा में प्रगट की। पढ़िए एक रिपोर्ट ।


वैशाली। नगर जो मनुष्य शोक से दग्ध हुए मनुष्यों को देखकर संतुष्ट होता है, अथवा जो मनुष्य किसी द्वेष बुद्धि से अन्य जीवों को दुःख देता है, अथवा जो मनुष्य अपने हृदय में किसी के साथ वैर विरोध कर संतुष्ट होता है। वह मनुष्य इन कार्यों के करने के अनंतर अथवा मरने के बाद शोक को प्राप्त होता है। यह मंगल देशना आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रणीत सागर जी ने वैशाली नगर महावीर जिनालय में आयोजित धर्म सभा में प्रगट की।

प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी के प्रभावक शिष्य आचार्य श्री कुंथु सागर जी के ग्रंथ भावत्रयफल प्रदेर्शी के दिव्तीय श्लोक की विवेचना में मुनि श्री ने आगे बताया कि मनुष्यों को जो शोक व संताप होता है। वह असाता वेदनीय कर्म के उदय से होता है। तथा असाता वेदनीय कर्म का आस्रव स्वयं शोक संताप करने से होता है अथवा दूसरों को शोक संताप उत्पन्न करने से होता है अथवा स्वयं शोक संताप करने और दूसरों को भी शोक संताप उत्पन्न करने से होता है। जब यह जीव मनुष्य किसी जीव को शोक से व अन्य किसी प्रकार के दुःख से अत्यंत दुःखी देखकर प्रसन्न होता है व स्वयं किसी को दुःख देकर व मारकर अथवा अन्य जीवों की किसी भी प्रकार की हानि करके प्रसन्न होता है अथवा किसी के साथ वैर-विरोध करके प्रसन्न होता है तब उस जीव के असाता वेदनीय कर्म का आस्रव होता है। उस आस्रव के अनंतर समय में उन आए हुए असाता वेदनीय कर्मों का बंध हो जाता है और वह बंध को प्राप्त हुआ कर्म जब उदय में आता है तब उस कर्म के उदय से उस जीव को अत्यंत शोक और संताप उत्पन्न होता है। यही समझकर प्रत्येक जीव को किसी जीव को सताना नहीं चाहिये, किसी जीव को किसी प्रकार का दुःख नहीं देना चाहिए।

चातुर्मास के निवेदन के साथ किया श्रीफल भेंट

सुभाष पाटनी राजेश,संजय अनुसार मुनि श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री निर्मोह सागर जी के प्रवचन हुए । मंगलाचरण श्रीमती संगीता पंचोलिया नमिता,प्रेमलता ने किया मुनि श्री प्रणीत सागर जी एवम मुनि श्री निर्मोह सागर जी को जिनवाणी राजेश पंचोलिया एवम् संगीता पंचोलिया ने भेंट की। मुनि श्री का विहार 4 फरवरी को सुदमानगर के लिए होगा। कार्यक्रम संचालक देवेंद्र छाबड़ा ने बताया कि वैशाली नगर समाज द्वारा दोनों मुनिश्री को वर्ष 2024 का चातुर्मास वैशाली नगर करने हेतु श्रीफल भेंट कर निवेदन किया गया।

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