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विश्वशांति महायज्ञ के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन : पाप, ताप और संताप को नष्ट करता है सिद्धचक्र विधान -ब्रह्मचारी विनोद भैया


सेठ परिवार महरौनी एवं सूरत गुजरात द्वारा अतिशय तीर्थ श्री दर्शनोदय थोवन जी में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का समापन बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य विद्यासागर एवं संत सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से ब्रह्मचारी विनोद भैया के मंगल सानिध्य में विधान की धार्मिक क्रियाएं संपन्न  हुईं। पढ़िए राजीव सिंघाई की  विशेष रिपोर्ट…


 

थोवन जी। सेठ परिवार महरौनी एवं सूरत गुजरात द्वारा अतिशय तीर्थ श्री दर्शनोदय थोवन जी में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का समापन बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य विद्यासागर एवं संत सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से ब्रह्मचारी विनोद भैया के मंगल सानिध्य में विधान की धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। ब्रह्मचारी विनोद भैया ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान की चकाचौंध और भौतिकता की दौड़ में मन की शुद्धि करने का यह विधान एक उपाय है। जिससे आत्मा परमात्मा से सीधे जुड़ सकती है। आत्मा की निर्मलता और मन शुद्धि का श्रेष्ठ उपाय है श्री सिद्धचक्र विधान। यह विधान भक्ति के माध्यम से कर्म चक्र को तोड़कर मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है।

बड़े बाबा का हुआ पूजन

इससे पहले प्रातः काल में बड़े बाबा का अभिषेक- पूजन किया गया। इंद्र-इंद्राणियों द्वारा सिद्ध भगवान की पूजा की गई।नित्य नियम पूजन में अष्ट द्रव्यों से देव- शास्त्र पूजन साथ विधान के समापन के अवसर पर विश्वशांति और कल्याण के लिए महायज्ञ में आहुति दी गई। इस मौके पर शांति देवी सेठ, डॉ. देवेंद्र सेठ, महेंद्र सेठ, अजित सेठ, अनूप सेठ, शीलचंद्र अनौरा, अमृतलाल जी भोपाल, राजेंद्र पांडेय, इंजीनियर सुनील, गौरव इंदौर, संकेत गुना, राजीव सूरत एवं ऋषि सेठ, राहुल, रोहित, नील, आगम, ग्रंथ, मोक्ष, निर्वाण सेठ, मलय उपस्थित रहे।

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