उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज से लगभग 20- 30 वर्ष पूर्व घरों में गायों को रखने के लिए सार होती थीl घर में बनी हुई पहली रोटी गाय को दी जाती थी। गाय से प्राप्त दूध से घी, दही, छाछ इत्यादि का लोग सेवन करते थे और हम हमेशा शुद्धता को पाते थे। पढ़िए राजीव सिंघाई की रिपोर्ट…
इंदौर। उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि…
1. कर्म की सत्ता – कहते हैं कर्म की सत्ता निष्पक्ष होती है!!! जो हमने पुण्य कर्म बांधे हैं वह हमेशा साता प्रदान करते हैं। जो हमने पाप कर्म बांधे हैं वे हमें असाता प्रदान करते हैं। कर्म की सत्ता जब तक पुण्य प्रकटाने वाली होती है तो सब कुछ अच्छा अच्छा होता है। किंतु कर्म की सत्ता जब पाप प्रकटाने वाली हो तो सब कुछ विपरीत होने लगता है। जब साता वेदनीय प्रगट होता है तो असाता वेदनीय दुर्बल हो जाता है। अर्हंत अवस्था प्रकट होने पर वेदनीय कर्म साता वेदनीय रूप में प्रबल सत्ता में आता है फलतः असाता दुर्बल रहने से कष्ट नहीं पहुंचाता है।
2. कमठ और पार्श्वनाथ – 10 भवों तक कमठ के जीव ने पार्श्वनाथ से वैर रखा वो भी एक तरफा। किंतु पार्श्वनाथ हमेशा यह भावना भाते रहे कि कमठ के जीव को सन्मति प्राप्त हो। धर्म क्षेत्र में, व्यापार क्षेत्र में अथवा किसी भी क्षेत्र में आपका प्रतिद्वंदी अगर आपसे ईर्ष्या रखता है और वह आपके प्रति दुर्भावना रखता है तो आप उसके लिए यह भावना भाएं कि उसे सन्मति प्राप्त हो। जिस प्रकार पार्श्वनाथ ने 10 भवों तक का कमठ को क्षमा किया और एक समय ऐसा आया, जब कमठ जीव पार्श्वनाथ का सबसे बड़ा भक्त बना।
3. चेटो= दास – जिन धर्म से विमुख करके मुझे चक्रवर्ती पद भी अगर कोई प्रदान करे तो उसे मैं ठुकरा दूंगा, संसार की सारी पद प्रतिष्ठा को मैं स्वीकार नहीं करूंगा और सदैव धर्म को चेटो =दास बन कर रहूंगा।
4. अच्छे भावों का छाता तंत्र मंत्र के कुप्रभाव को भी रोकता है- भावनाएं तो भव नाशनि होती हैं। शुद्ध अंतःकरण से भाई गई भावनाएं जब जन्म मरण रूपी दुख और संसार का नाश कर सकती हैं, तो तंत्र मंत्र उसके सामने क्या टिकेंगे। हमेशा भावनाएं शुद्ध रखें।
5. घर में सार को पुनर्स्थापित करिए – आज से लगभग 20- 30 वर्ष पूर्व घरों में गायों को रखने के लिए सार होती थीl घर में बनी हुई पहली रोटी गाय को दी जाती थी। गाय से प्राप्त दूध से घी, दही, छाछ इत्यादि का लोग सेवन करते थे और हम हमेशा शुद्धता को पाते थे। किंतु आज पैकेट वाला दूध लाकर घर में अशुद्धि ला रहे हैं। आज घरों से सार चली गई, इसी कारण से मांसाहार की बिक्री बढ़ गई है। हम जैनी आज आंदोलन में लगे रहते हैं कि कत्लखानों को बंद किया जाए, अगर हम अपने घरों में सार को पुनः स्थापित कर लेते हैं तो सोचिए हमें इन आंदोलनों को करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। घर में सार रखिए। गोबर के कंडो के ऊपर बनी बाटी नहीं खानी चाहिए क्योंकि कंडों में असंख्य जीवों का घात होता है, यह महापाप है।
6. चिड़ियाघर जाने से आप मांसाहार उद्योग का पोषण कर रहे हैं – जब हम चिड़ियाघर में जानवरों को देखने के लिए जाते हैं तो याद रखिए उन स्थानों पर मांसाहारी जीवों शेर, व्याघ्र इत्यादि भी होते हैं। आपके द्वारा ली गई टिकटों से उन जानवरों के लिए मांस खरीदा जाता है और उन्हें वह भोजन के रूप में दिया जाता है। यानि की कहीं ना कहीं आपके धन का उपयोग भी इस मांसाहार के पोषण में सहायक है। चिंतन करिए।
7. घर में कुता नहीं पालना चाहिए – अपने घरों में कुत्ते इत्यादि नहीं पालना चाहिए। दरअसल कुत्ता जाति विरोधी होता है, वह अपनी ही जाति के लोगों से स्नेह नहीं करता। उनसे ही वैर और ईर्ष्या रखता है। वह अपनी ही जाति के लोगों को देखकर भौंकता है, काटने के लिए दौड़ता है। और याद रखिए हम मनुष्य हैं हम जाति स्नेही और समस्त विश्व की कल्याण की भावना रखते हैं। हम जैन हैं, हमें जैनत्व की रक्षा करनी ही चाहिए।
उदयनगर मंदिर प्रबंधन समिति के पदाधिकारी राकेश जैन पम्पू ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 8:30 बजे से धर्म उदय की स्थली उदयनगर इंदौर में आचार्यकल्प श्री 108 विवेक सागर जी की ज्ञानमंदाकनी, आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज की ज्ञानसरिता भेदविज्ञानी आ. रत्न 105 श्री विज्ञानमती माता जी के बोध गम्य प्रवचन का लाभ लेने हेतु पधारें।













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