अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन शृंखला में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार में कोई भी व्यक्ति अपने दुख से दुखी नहीं है। वह पड़ोसी के सुख से दुखी है। मनुष्य दूसरों को देखकर दुखी होता है कि उसके पास यह है, वह है और मेरे पास कुछ नहीं या मेरे से अधिक उसके पास है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। आचार्य श्री अभिनंदन सागर महाराज के शिष्य अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज का पूज्य वर्षायोग -2023 श्री 1008 मुनिसुव्रत नाथ दिगम्बर जैन मंदिर, स्मृति नगर में हो रहा है। इस दौरान अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन शृंखला में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार में कोई भी व्यक्ति अपने दुख से दुखी नहीं है।

वह पड़ोसी के सुख से दुखी है। मनुष्य दूसरों को देखकर दुखी होता है कि उसके पास यह है, वह है और मेरे पास कुछ नहीं या मेरे से अधिक उसके पास है। इस संसार में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो अपने दुख से दुखी हो। व्यक्ति दूसरों को देखकर अपने अंदर दुर्भावना पैदा कर लेता है। आज समाज, देश, परिवार में लड़ाई-झगड़ा दिखाई दे रहा तो उसके पीछे वजह यही है कि हम दूसरों की उन्नति को देखकर उनके प्रति दुर्भावना करते हैं। जो दूसरों देखता है, वह रावण बन जाता है और जो अपने आप को देखता है, वह राम बन जाता है।

दूसरों को देखने से नकारात्मक विचार आते हैं और अपने आप को देखने से स्कारात्मक सोच आती है और हमें शत्रु भी अपना दिखाई देता है। आज व्यक्ति का पहनावा, खाना आदि दूसरे के लिए होता है। वह दूसरे के लिए पहनता है, अपने लिए नहीं। आप ने देखा होगा कि घर में तो वह कैसे भी कपड़े पहन लेता है, खा लेता है लेकिन जब वह बाहर जाता है तो उसका सब बदल जाता है क्योंकि दूसरे उसे देखेंगे। आज स्थिति इतनी बदल गई है कि दूसरों के कारण वह धर्म के कार्य भी छोड़ देता है। सभा का संचालन ब्रह्मचारी अजय भैया ने किया।













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