श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर व महावीर जिनालय में सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। पढ़िए सन्मति जैन की रिपोर्ट…
सनावद। श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर व महावीर जिनालय में सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। विधान के पांचवे दिन श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीजी के समक्ष मंडल पर 512 अर्घ्य चढ़ाए। साथ ही भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन के पहले दिन से ही प्रतिदिन धर्मानुरागी सुबह से बड़ी संख्या में भगवान का पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और विधान करने बड़ी भक्ति भाव से मंदिर पहुंच रहे हैं। रात्रि में प्रदीप पंचोलिया, प्रशांत जैन, गोरु जटाले, कमल केके, अंशुमा जैन, श्रुति जैन, संगीता जैन भगवान की आरती-भक्ति कर सभी को मंत्र मुक्त कर रहे हैं।
वहीं अचिंत्य भैया जी ने कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान के आयोजन में सिद्धों की आराधना करने व सिद्ध भगवान के गुण अनुभाव का अवसर हमें प्राप्त हुआ है। सिद्ध भगवान तीनों कर्म मलों से रहित हो गए हैं। देह से रहित अनंत काल तक आनंद में विराजते हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने दैनिक जीवन में मन से, वचन से, काय से, गलत काम करना, कराना एवं करने वाले की अनुमोदना करना, क्रोध के कारण, मान के कारण, माया के कारण, लोभ के कारण, किसी गलत कार्य को करने का विचार करना, गलत कार्य करने के साधन जुटाना एवं कार्य को प्रारंभ करना इस प्रकार से कुल 108 प्रकार के पापों का आश्रव करते रहते हैं।

सोमवार को मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा का पर्व
सोमवार को अष्टान्हिका पर्व के समापन व गुरुपूर्णिमा के अवसर पर सकल जैन समाज के द्वारा प्रातः बड़े मंदिर से रथ यात्रा निकाल कर नगर भ्रमण करके पुन मंदिर में जुलूस का समापन कर श्रीजी का अभिषेक कर अष्टान्हिका पर्व का समापन किया जायेगा।













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