जूना मंदिर पार्श्वनाथ का तीन दिवसीय पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव बुधवार से प्रारंभ हुआ। जूना मंदिर परिसर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि शुभम सागर ने कहा कि मनुष्य को अपनी निज आत्मा का ध्यान कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। मनुष्य को किसी भी चीज को अपना अधिकार मान कर उसका उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि सभी वस्तु इस संसार में नश्वर हैं। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट…
कुशलगढ़। नगर के जूना मंदिर पार्श्वनाथ का तीन दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ का शुभारंभ बुधवार से हुआ। पहले दिन मंदिर में अर्घ्य समर्पण, देव व गुरु आज्ञा की धार्मिक क्रियाएं की गईं।
निकाली गई शोभायात्रा
समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ व मंत्री हसमुखलाल सेठ ने बताया कि गंधकुटी में विराजित कर मूलनायक भगवान पारसनाथ समेत अन्य प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली गई। इसमें सौधर्म इंद्र पंकज कुमार जयंतीलाल सेठ, भगवान के माता-पिता हंसमुखलाल, शांतिलाल सेठ, कुबेर इंद्र विजयलाल कोठारी, समस्त इंद्र, अष्ट कुमारियां, ध्वजारोहण कर्ता परिवार, मंडल उद्घाटन परिवार, मंगल कलश स्थापना परिवार को बग्घी में बैठाकर नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए प्रतिष्ठास्थल वाराणसी नगरी नक्कार गार्डन पहुंची। जहां शकुंतला सेठ, गेंदालाल, संजय, निकेश, राजेश सेठ परिवार ने ध्वजारोहण किया।

इन्हें प्राप्त हुआ सौभाग्य
कांता बेन रतनलाल कोवालिया, जयंतीलाल, जितेंद्र, सुरेंद्र, अनुज, आरुष कोवालिया परिवार ने प्रतिष्ठा महोत्सव के मंडप का उद्घाटन किया। दीप प्रज्वलन, चित्र अनावरण, मंगल कलश स्थापना कर्ता प्रवीण, विवेक, नितिन दोसी परिवार रहे। तीन दिन के स्वामी वात्सल्य का लाभ सेठ प्रदीप कुमार शांतिलाल, अंकित कुमार, सम्यक कुमार सेठ परिवार ने लिया। जूना मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ का पंचामृत अभिषेक और पूजा गई। दोपहर 1 बजे से प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया के सान्निध्य में सभी इंद्रों का सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, याग मंडल पूजन, अंतरंग संस्कार विधि, गर्भावतरण, गर्भ कल्याणक पूजन, हवन व माता की गोद भराई के कार्यक्रम हुए। अष्ट कुमारियों ने नृत्य के माध्यम से भगवान की माता की गोद भराई भक्तिभाव से धार्मिक क्रियाओं के साथ संपन्न की। शाम 7.30 बजे आरती, गर्भ कल्याणक कार्यक्रम हुए, जिसमें समस्त प्रतिष्ठा समाजजनों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम गरबा और नृत्य किया।
मोक्ष मार्ग प्रशस्त करें
जूना मंदिर परिसर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि शुभम सागर ने कहा कि मनुष्य को अपनी निज आत्मा का ध्यान कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। मनुष्य को किसी भी चीज को अपना अधिकार मान कर उसका उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि सभी वस्तु इस संसार में नश्वर हैं। सामायिक में हमेशा भगवान का चिंतन होता है। मनुष्य अपने क्रोध, मान, माया, लोभ आदि भावों का त्याग कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करे। मुनि श्री ने बताया कि भगवान पारसनाथ पर कमठ ने अनेकों उपसर्ग किए, परंतु फिर भी भगवान ने कमठ के प्रति कभी भी ईर्ष्या का भाव नहीं रखा। इसी तरह प्रत्येक मनुष्य को सम्यक दृष्टि, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र, इन तीनों चीजों का पालन करना चाहिए।













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