महरौनी में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस बुधवार को शौरीपुर नगरी में तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। प्रातःकाल की मंगल बेला पर श्रावकगणों ने शांतिजाप कर श्री जिनेन्द्र पूजन किया। पढ़िए राजीव सिंघाई की विस्तृत रिपोर्ट…
महरौनी। निज शुद्धात्मा ही तीनों लोकों में सार है, जिसके आश्रय से ही मुक्ति रूपी सुंदरी का वरण किया जा सकता है, यह संसार क्षण भंगुर है और शुद्धात्मा अजर अमर जिसके आश्रय से ही भक्त से भगवान बना जा सकता है। क्षण भंगुर संसार की असारता को देख इस भावना का भान हुआ युवराज नेमी कुंवर को और वह जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार कर गिरनार के जंगलों में जाकर आत्म साधना में लीन हो गए। महरौनी में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस बुधवार को शौरीपुर नगरी में तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। प्रातःकाल की मंगल बेला पर श्रावकगणों ने शांतिजाप कर श्री जिनेन्द्र पूजन किया। इसके पश्चात इंद्र सभा एवं राज सभा में तत्वचर्चा का आनन्द लेकर वस्तु का स्वरूप समझा। शौरीपुर के दरबार में युवाराज नेमी कुंवर की शादी की चर्चा भी चली, बारात भी निकली लेकिन रास्ते में वैराग्य का कारण बना और युवराज नेमी कुंवर बन गए मुनिराज नेमीनाथ। दीक्षा के समय इंद्र और राजाओं में वनगमन के पूर्व पालकी उठाने का सुंदर चित्रण कुशल मंच संचालक पण्डितश्री संजयजी जेबर कोटा द्वारा दर्शाया गया। अंत में सौधर्म इंद्र ने कहा कि जो नेमिनाथ जी के साथ दीक्षा धारण करेगा, वही पालकी उठाने का अधिकारी होगा और अंत मे मनुष्यों को अर्थात राजाओं को यह सौभाग्य मिला और उन्होंने प्रथम पालकी उठाई। पण्डितश्री राजेंद्रकुमारजी जैन जबलपुर वालों के वैराग्यमय प्रवचन का लाभ सकल समाज को प्रात हुआ।

संगोष्ठी का हुआ आयोजन
दोपहर में विद्धत संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय रखा गया पंचकल्याणक का स्वरूप और उसका महत्व। इसका सफल संचालन पं. विराग शास्त्री जबलपुर एवं मंगलाचरण पं. सुनील धवल भोपाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मनीष शास्त्री मेरठ के साथ पं. राजेंद्रकुमार जैन टीकमगढ़, पं. राहुल शास्त्री नवगवां, पीयूष शास्त्री जयपुर, डॉ. मनोज जैन जबलपुर एवं डॉ. विकास जैन शास्त्री बानपुर ने सुंदर विचार रख उपस्थित जन समुदाय को पंचकल्याणक महोत्सव एवं वर्तमान समय में उसके महत्व को समाज को बताया। संध्या के समय श्री जिनेन्द्र भक्ति कर डॉ. मनीष शास्त्री मेरठ के प्रवचनों में मनुष्य जीवन की सार्थकता पर प्रकाश डाला गया। इसके पश्चात जयपुर से पधारे अंतरराष्ट्रीय वक्ता डॉ. एस.पी. भारिल्ल ने सेमीनार में इन भावों का फल क्या होगा, इस पर सुंदर वक्तव्य देकर सभी का मन जीत लिया। इसके पश्चात आध्यात्मिक भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें आत्मार्थी भजन गायक पं.संजीवकुमार जैन उस्मानपुर दिल्ली ने सुंदर-सुंदर तात्विक भजन लेकर आयोजन में चार चांद लगा दिए। इस अवसर पर सकल समाज ने भक्ति रस का आनंद लेकर नृत्यगान करते हुए जिनशासन की प्रभावना की।
मनेगा ज्ञानकल्याणक महोत्सव
महोत्सव के मीडिया प्रभारी दीपकराज जैन एवं संयोजक राजीव चौधरी ने बताया कि चतुर्थ दिवस गुरुवार को ज्ञानकल्याणक महोत्सव का शुभारंभ प्रातः 6 बजे शांति जाप सहित श्री जिनेन्द्र पूजन से होगा। इसके पश्चात 8 बजे से गुरुदेवश्री का सीडी प्रवचन, 8.30 से शास्त्र स्वाध्याय, 9.15 से मुनिराज नेमिनाथजी की नवधाभक्ति पूर्वक आहार विधि, 2 बजे से आध्यात्मिक संगोष्ठी, 3.30 से समवशरण में दिव्यध्वनि प्रसारण, समवशरण सभा, केवलज्ञान पूजन होगी। संध्या 7 बजे से श्री जिनेन्द्र भक्ति, 7.30 से शास्त्र स्वाध्याय, 8.30 से प्रथमनुयोग कथा पं. संजय शास्त्री कोटा द्वारा एवं 9.15 से कृतज्ञता ज्ञापन समारोह, आभार विधि होगी।













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