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सबसे बड़ा दान, सबसे बड़ा पुण्य आहारदान के लिए चौका लगाना: दिगंबर जैन संतों के आगमन पर आहारदान के लिए चौका अवश्य लगाएं


दुनिया का सबसे बड़ा पुण्य व सबसे बड़ी धर्म प्रभावना है दिगंबर साधु को आहारदान देना व चौका लगाना और अपने गांव-नगर में यदि संत समूह आया है तो वहां के समाज के परिवारों का सबसे प्रमुख आवश्यक कर्तव्य आहारदान है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। आपके नगर, आपके गांव-मोहल्ले या क्षेत्र में दिगम्बर जैन संत का संघ आ रहा है तो समाज की सबसे बड़ी सेवा है उनको आहारदान के लिए चौका लगाना। दुनिया का सबसे बड़ा पुण्य व सबसे बड़ी धर्म प्रभावना है दिगंबर साधु को आहारदान देना व चौका लगाना और अपने गांव-नगर में यदि संत समूह आया है तो वहां के समाज के परिवारों का सबसे प्रमुख आवश्यक कर्तव्य आहारदान है।

यही एकमात्र आगम व्यवस्था है जिसमें दिगम्बर जैन संत आपके घर मे आकर आहार ग्रहण करते हैं। एक दिगम्बर जैन संत करोड़ों की सम्पदा देने पर भी किसी के घर नहीं जाते क्योकि सब कुछ वैभव छोड़कर वे संत बने हैं लेकिन जब आपके घर चौका लगा है तो भगवान महावीर के अवतार ये संत 24 घंटों के उपवास के पश्चात आपके घर आकर नवाधाभक्तिपूर्वक आहार ग्रहण करते हैं।

कहते है चौका लगाकर आहारदान देना पूण्य रूपी वृक्ष की सीधे जड़ को पानी डालकर सींचने के बराबर है जिससे पूण्य रुपी सम्पूर्ण वृक्ष पल्लवित होता है जबकि अन्य सभी धर्म कार्य पेड़ की पत्ती सींचने के समान है जिससे सिर्फ पत्तियां ही हरित रह सकती हैं।
अतः ज्ञानियों चाहे कैसा भी अवसर या आयोजन हो आपके क्षेत्र में दिगम्बर जैन संतों का आगमन हुआ हो तो आहारदान निमित्त चौका अवश्य लगाएं। यही सबसे बड़ा महापुण्य है जो आपके घर को, आपके जीवन को, आपके आत्म को, आपके द्रव्य को पवित्र करता है। संत के आने पर घर-घर चौका लगना ये दुनिया की सबसे बड़ी अमीरियत है जो आपको भव भवान्तर के सुख दे जाती है।

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