संतोष नगर, गारियावास में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में कल्याण मंदिर विधान का महापूजन हुआ। आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि भगवान ने 8 रोगों को दूर कर 8 द्रव्य प्राप्त किए हैं।आज का मानव अक्षय पद के बजाए लौकिक पदों के लिए लड़ते-झगड़ते हैं, यह लौकिक पद नाशवान है। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…
उदयपुर। संतोष नगर, गारियावास में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में कल्याण मंदिर विधान का महापूजन हुआ। आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि विधान की पूजन में आपने 8 द्रव्य चढ़ाए हैं ,लेकिन इन द्रव्यों का क्या प्रयोजन है।भगवान ने 8 रोगों को दूर कर 8 द्रव्य प्राप्त किए हैं।आज का मानव अक्षय पद के बजाए लौकिक पदों के लिए लड़ते-झगड़ते हैं, यह लौकिक पद नाशवान है। ब्रह्मचारी गजू भैया और राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि जन्म जरा, मृत्यु नष्ट होने पर अच्छे अक्षय पद की प्राप्ति होती है। विषय कामनाएं और नाना प्रकार की अनंत इच्छाएं हैं, संसार में अनंत इच्छा पूर्ण करने का किसी में सामर्थ्य नहीं है।
संसार का लौकिक सुख शास्वत नहीं
कामवासना को मिसाइल निरूपित करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि इस कारण आप दुखी हैं।विज्ञान कहता है कि ज्ञान प्रकट हो। आपकी तरह श्री पारसनाथ भगवान ने भी संसार का परिभ्रमण किया है। उन्होंने संसार से दुखी होकर शास्त्र में बताए समीचीन मार्ग का अनुसरण कर पुरुषार्थ से जीवन, संसार भ्रमण से मुक्ति पाई है। उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया है। मोक्ष पद उन्होंने अपनी इच्छाओं को नष्ट करके प्राप्त किया है। संसार का लौकिक सुख शास्वत नहीं है। आप लोगों ने भक्ति पूर्वक पूजन किया किंतु पूजन निराकुलता पूर्वक करना चाहिए, परिणामों की शुद्धि होना चाहिए,परिणामों की विशुद्धि होने पर पुण्य की प्राप्ति होगी। भगवान की वाणी को समझकर पानी पीना चाहिए। मोह रूपी अज्ञान अंधकार को निकलने के का देव शास्त्र गुरु ने मार्ग बताया है। मोह अज्ञान अंधकार के कारण हम दुखी हैं, शरीर निरंतर बदलते रहते हैं। संसार परदेश है और आत्मा का देश सिद्धालय है। हम इसे प्राप्त करने का पुरुषार्थ कर जीवन को सार्थक करें।













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