भगवान चंद्रप्रभु जी जन्मस्थली वाराणसी से 23 किमी दूर चंद्रावती के विकास के लिए गंगातट पर भव्य जैन घाट निर्माण की उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा की है। वर्ष 2016 से वाराणसी सहित उत्तर प्रदेश में जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली को जोड़ने व इनके आसपास के क्षेत्र के विकास हेतु जैन सर्किट की मांग विश्व जैन संगठन द्वारा हो रही थी। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर वाराणासी। भगवान चंद्रप्रभु जी जन्मस्थली वाराणसी से 23 किमी दूर चंद्रावती के विकास के लिए गंगातट पर भव्य जैन घाट निर्माण की उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा की है। वर्ष 2016 से वाराणसी सहित उत्तर प्रदेश में जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली को जोड़ने व इनके आसपास के क्षेत्र के विकास हेतु जैन सर्किट की मांग विश्व जैन संगठन द्वारा हो रही थी। 8वें जैन तीर्थंकर चंद्रप्रभु भगवान जी की जन्मस्थली चंद्रावती के कायाकल्प के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा “चंद्रावती” में पक्के गंगा घाट के साथ ही पूरे क्षेत्र को धार्मिक दृष्टिकोण से विकास करने की घोषणा की गई है। काशी में चार तीर्थंकरों भगवान पार्श्वनाथ, सुपार्श्वनाथ, श्रेयांसनाथ एवं चंद्रप्रभु भगवान की जन्मस्थली चंद्रावती वाराणसी से 23 किमी दूर गाजीपुर रोड पर गंगा किनारे स्थित है।
रिटेंशन वॉल भी बनेगी
पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राजेंद्र कुमार रावत ने बताया कि जैन धर्म को मानने वाले देश-विदेश से हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। 200 मीटर लम्बे घाट के पुनरुद्धार व सुविधाओं के बढ़ जाने से आने वाले समय में ये स्थान तीर्थाटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा, आने वाले समय में इस घाट को पानी के रास्ते भी जोड़ने की योजना है, जिससे बोट या क्रूज से पर्यटन यहां पहुंच सके। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए घाट पर तीन प्लेटफार्म बनाये जा रहे हैं। घाट से नीचे उतरने के लिए सीढ़ियों होंगी। इसके अलावा पूरे घाट का हेरिटेज लुक होगा, साथ ही गाबियन और रिटेंशन वॉल से घाट तैयार किया जा रहा है, जिससे ये देखने में पुराने घाटों की तरह होगा और बाढ़ में भी सुरक्षित रहेगा। विश्व जैन संगठन, जैन राजनैतिक चेतना मंच ने राज्य सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन, जैन राजनैतिक चेतना मंच के सुभाष काला, मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू,राजीव जैन बंटी, राजेन्द्र सोगानी, प्रदीप गंगवाल ने सरकार के प्रति आभार प्रकट किया।
ईको फ्रेंडली होंगे घाट
घाट का निर्माण पूरी तरह से ईको फ्रेंडली होगा। टॉयलेट ब्लॉक, पोर्टेबल चेंजिंग रूम, साइनेजेस, पार्किंग, हेरिटेज लाइट, बैठने के लिए पत्थर के बने बेंच होंगे और पत्थरों से बनी जालीनुमा खूबसूरत रेलिंग लगाई जाएगी, साथ ही बागवानी भी होगी। पूरे घाट के निर्माण की लागत 17.07 करोड़ है। घाट का निर्माणवर्ष 2024 तक पूरा होना प्रस्तावित है।













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