बुंदेलखंड के 1000 वर्ष प्राचीन जैन तीर्थ क्षेत्र बंधा जी में आचार्य भगवन के शिष्य मुनि श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज पांच मुनिराजों के साथ विराजमान हैं। प्रतिदिन मुनि श्री के सानिध्य में भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा चल रही है। पिछले माह 6 अप्रैल को मुनि संघ के सानिध्य में बंधा जी में पूर्णमासी कलश की स्थापना हुई थी। पढ़िए राजीव सिंघई की विशेष रिपोर्ट…
बुंदेलखंड। इलाके के 1000 वर्ष प्राचीन जैन तीर्थ क्षेत्र बंधा जी में आचार्य भगवन के शिष्य मुनि श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज पांच मुनिराजों के साथ विराजमान हैं। प्रतिदिन मुनि श्री के सानिध्य में भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा चल रही है। प्रतिदिन मुनि श्री के प्रवचन हो रहे हैं। पिछले माह 22 अप्रैल को अजितनाथ भगवान सहित श्रीजी की सभी प्रतिमाएं प्राचीन मंदिर से आचार्य विद्यासागर रजत सभागार में अस्थाई वेदियों पर विराजमान की गईं। मुनि श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज के प्रवचन प्रतिदिन यूट्यूब चैनल के माध्यम से ऑनलाइन होते हैं। देश और दुनिया के लोग मुनि श्री के प्रवचन का घर बैठे लाभ ले रहे हैं।

पूर्णमासी कलश की स्थापना
पिछले माह 6 अप्रैल को मुनि संघ के सानिध्य में बंधा जी में पूर्णमासी कलश की स्थापना हुई थी। देशभर से करीब 3000 लोगों ने बंधा जी आकर पूर्णमासी कलश स्थापित किए थे। जिन लोगों ने पिछले माह अपने कलश स्थापित किए थे, वे सभी लोग शुक्रवार, 5 मई को बंधा जी आकर अपने कलश अपने घर ले जाकर स्थापित करेंगे। यह कलश रिद्धि-सिद्धि एवं मनवांछित फल देने वाले होंगे। एक महीने तक इन सभी कलशों को मुनि संघ द्वारा मंत्रों से मंत्रित किया गया है।

भक्तों का आना शुरू
प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि शुक्रवार को सुबह 6:00 बजे से भक्तों का आना शुरू हो गया था। देशभर से करीब 10000 लोग बंधा जी पहुंचे। सुबह 8:00 बजे से मूलनायक अजितनाथ भगवान की शांति धारा मुनि श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज के मुखारविंद से संपन्न हुई। सुबह 9:00 बजे से कलश रखने की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले कलश की शुद्धि की गई, इसके बाद कलश में अनेक प्रकार की सामग्री रखी गई। बाल ब्रह्मचारी दीपक भैया जी द्वारा कलश की संपूर्ण विधि संपन्न करवाई। सुबह 10:30 बजे मुनि संघ की आहार चर्या संपन्न हुई। दूसरी पाली में दोपहर 2:00 से फिर से कलश रखने की प्रक्रिया शुरू की गई।
एक प्रतिमा अवश्य स्थापित कराएं
मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि हमारी आत्मा अमर है। शरीर तो एक ना एक दिन छोड़कर जाना ही है। आप लोगों को बंधा जी में बनने वाले सहस्त्र कूट जिनालय में एक प्रतिमा विराजमान अवश्य करानी है। मुनि श्री ने कहा कि आप लोग दस, बीस, पचास साल धरती के मेहमान हो, सब छोड़कर चले जाओगे। जब आप मरण को प्राप्त हो और किसी भी पर्याय में जाओगे। जब व्यक्ति आपके द्वारा स्थापित प्रतिमा को नमोस्तु करेगा तो उसका पुण्य आपको बराबर मिलता रहेगा। आचार्य श्री ने कहा कि धन का सबसे बड़ा उपयोग जिन प्रतिमाओं का निर्माण एवं जिनालयों का निर्माण है। धन के सदुपयोग की इससे बड़ी कोई व्यवस्था नहीं है।
प्रदान की स्वीकृति
इस मौके पर कई लोगों ने बंधा जी में बनने वाले सहस्त्र कूट जिनालय में प्रतिमाओं को विराजमान करने की स्वीकृति प्रदान की। कलश स्थापना कार्यक्रम में कमेटी की ओर से अनोज जैन, संजय धमासिया, राजेंद्र मोदी, कैलाश जैन एलडी बल्ले जैन, महेश, कमलेश चौधरी, महेंद्र सिमरा, बाबा नायक, जीतू जैन, अजित जैन, आदि लोग शामिल रहे।













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