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अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक महोत्सव का द्वितीय दिवस: दरबार सजा, अष्टकुमारियों व कुमारियों ने इंद्र-इंद्राणियों के साथ नृत्य किया 


श्री 1008 आदिनाथ त्रिकाल चोवीसी मज्जिनेन्द्र अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव कल्पतरु में गर्भ कल्याणक (उत्तर रुप) मनाया गया। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। श्री 1008 आदिनाथ त्रिकाल चोवीसी मज्जिनेन्द्र अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव कल्पतरु में आचार्य विशुद्ध सागर हाराज के परम शिष्य मुनिश्री आदित्य सागर महाराज, मुनिश्री अप्रमित सागर महाराज, मुनिश्री सहज सागर महाराज के परम सानिध्य मे प्रतिष्ठाचार्य पं पवन दीवान एवं सह प्रतिष्ठाचार्य पं शांतिलाल जैन के पावन निर्देशन में गर्भ कल्याणक (उत्तर रुप) मनाया गया।

नृत्य व आरती के जरिए किया प्रभु का वंदन 

सुबह अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद देव शास्त्र गुरु की पुजन गर्भ कल्याणक की पुजन किया गया। पंडाल शुद्धि वेदी शुद्धि भुमि शुद्धि सकलीकरण की प्रक्रिया मंत्रोच्चार के साथ कि गई। मीडिया प्रभारी प्रवीण जैन राजेश जैन दद्दू ने बताया कि शाम को भव्य आरती की गई। आरती में बड़ी संख्या मे महिला पुरुष संगीत की धुन पर नृत्य करते हुए प्रभु को वंदन करते हुए आरती की गई।

महाराजा नाभिराय का दरबार लगा 

महाराजा नाभिराय का दरबार लगाया गया। माता मरुदेवी को सोलह स्वप्न आए माता मरुदेवी की सेवा में अष्टकुमारियां 56 कुमारियां लगी हुई थीं। कुबेर इंद्र के पुरी नगरी को रत्नों के द्वारा सजाया गया। नगर में रत्नवृष्टि की गई। सौधर्म इन्द्र – सचि इन्द्राणी के साथ अष्टकुमारियों 56 कुमारियों ने इन्द्र इंद्राणियों के साथ नृत्य किया और अपार खुशियां मनाईं।

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