मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज ने पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर अंजनी नगर के तत्वाधान में चंदा प्रभु मांगलिक भवन में आयोजित धर्म सभा में कहा कि सभी जीवों को अपने प्राण प्रिय हैं और जैनत्व की पहली शर्त है अहिंसा और करुणा एवं एकेन्द्रीय से लेकर पंचेेंद्रीय तक सभी जीवों के प्रति दया, करुणा और उनकी रक्षा का भाव रखना। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। आज अपने नाम के साथ जैन लिखने वाले बहुत हैं लेकिन उनके दैनिक जीवन और व्यवहार में जैनत्व के सिद्धांत और जैन जीवन शैली के अनुरूप आचरण दिखाई नहीं देता, जो चिन्तनीय और विचारणीय है। यह बात आज श्रुत संवेगी मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज ने पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर अंजनी नगर के तत्वाधान में चंदा प्रभु मांगलिक भवन में आयोजित धर्म सभा में कही। उन्होंने कहा कि सभी जीवों को अपने प्राण प्रिय हैं और जैनत्व की पहली शर्त है अहिंसा और करुणा एवं एकेन्द्रीय से लेकर पंचेेंद्रीय तक सभी जीवों के प्रति दया, करुणा और उनकी रक्षा का भाव रखना। अहिंसा धर्म के पालन और जीवो की रक्षा के लिए यदि अपने प्राणों का त्याग भी करना पड़े तो संकोच मत करना।
चिंतन की धारा बदलो
आपने जीव दया की भावना के साथ जैन जीवन शैली अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जो व्यक्ति जीवों के प्रति दया अहिंसा और करुणा एवं उनके प्राणों की रक्षा का भाव रखता है और जैनत्व के सिद्धांतों के अनुसार नियम संयम पूर्वक जीवन जीता है, वह परम पद को प्राप्त होता है। मुनि श्री ने आगे कहा कि अपने चिंतन की धारा बदलो और द्रव्य हिंसा और भाव हिंसा से बचो, रात्रि भोजन एवं अभक्ष्य खाद्य पदार्थों का त्याग करो। प्रारंभ में अचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन हंसमुख गांधी एवं अंजलि नगर जिनालय के ट्रस्टीयों ने किया। मुनि श्री के पाद प्रक्षालन लीड्स रेसीडेंसी के सदस्यों ने किए एवं शास्त्र भेंट अंबिकापुरी के श्रावकों ने किए। इस अवसर पर डॉक्टर जैनेंद्र जैन, टी के वेद, देवेंद्र सेठी राजेंद्र नायक आदि ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म सभा के संचालन श्री देवेंद्र सोगानी ने किया। प्रचार प्रमुख श्री राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री के प्रवचन चंदा प्रभु मांगलिक भवन अंजनी नगर में 23 तारीख तक प्रतिदिन प्रातः8:30 होंगे।













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