पूज्य मुनिश्री विरंजन सागर जी महाराज से दो दिन पूर्व ही क्षुल्लिका दीक्षा के बाद जीवन पर्यन्त तक के लिए स्वेच्छा से चारों प्रकार के आहार का त्याग कर बिना प्रमाद के पूज्य 105 श्री पुष्पमती माताजी का संल्लेखनापूर्वक समाधिमरण हो गया। पढ़िए राजेश रागी बकस्वाहा की रिपोर्ट…
छतरपुर। क्षुल्लिका श्री पुष्पमती माता जी की संल्लेखना (समाधिमरण) निर्मल परिणामों के साथ कोई एक माह से ज्यादा समय से अन्न का त्याग कर चल रही थी। पूज्य मुनिश्री विरंजन सागर जी महाराज से दो दिन पूर्व ही क्षुल्लिका दीक्षा के बाद जीवन पर्यन्त तक के लिए स्वेच्छा से चारों प्रकार के आहार का त्याग कर बिना प्रमाद के पूज्य 105 श्री पुष्पमती माताजी का संल्लेखनापूर्वक समाधिमरण हो गया।
लोग पहुंचे अंतिम दर्शन को
जैन समाज के डॉ. सुमति प्रकाश जैन ने बताया कि समाधिमरण के पश्चात माता जी का डोला सुबह करीब सात बजे मुनि श्री विरंजन सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में जैन धर्मशाला से दयोदय गौशाला पहुंचा। गौशाला परिसर में ही माताजी के अंतिम संस्कार की क्रियाएं विधि-विधानपूर्वक की गईं। इस अवसर पर जैन समाज के सभी पदाधिकारियों, माताजी के परिजनों सहित समाज का विशाल जनसमूह माताजी के अंतिम दर्शन करने और अपनी विनम्र विनयांजलि अर्पित करने गौशाला पहुंचा। करीब 87 वर्षीय पूज्य माताजी गृहस्थ जीवन के कुन्दन लाल की धर्मपत्नी एवं अमिताभ जैन की मां थीं। उन्होंने वर्षों पूर्व आचार्य विद्यासागर जी से व्रतों को ग्रहण किया था, जिसका वह दृढ़ता के साथ पालन कर रही थीं।













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