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श्रवणबेलगोला के विकास में योगदान को किया याद : कर्मयोगी चारुकीर्ति भट्टारक जी के समाधिमरण पर विनयांजली


मुनिश्री सुधासागर महाराज ने समाधि में असमय लीन हुए श्रवणबेलगोला के भट्टारक कर्मयोगी चारूकीर्ति स्वामी जी को श्रद्धांजलि दी। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट..


महरौनी(ललितपुर)। मुनिश्री सुधासागर महाराज की उपस्थिति में यशोदय तीर्थ कमेटी और दिगम्बर जैन पंचायत समिति ने तीर्थक्षेत्र श्रवणबेलगोला के भट्टारक कर्मयोगी चारूकीर्ति के समाधिमरण पर विनयांजली अर्पित की। मुनिश्री सुधासागर महाराज ने उन्हें श्रमण संस्कृति का रक्षक बताते हुए कहा कि चारुकीर्ति स्वामी जी ने श्रमण संस्कृति और धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और श्रवणबेलगोला के विकास में अपना योगदान दिया।

उन्होंने दक्षिण और उत्तर भारत को जोड़ने का काम किया। उन्होंने चारुकीर्ति भटटारक जी के सद्कार्यों के लिए मंगल आशीर्वाद दिया। वहीं यशोदय तीर्थ के अध्यक्ष राजा चौधरी ने कर्मयोगी चारुकीर्ति भटटारक जी के समाधिमरण होने पर विनयांजली अर्पित की और अपने भाव रखे। मंत्री राजेश मलैया ने भट्टारक जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले पचास वर्षों से भट्टारक जी ने तीर्थ क्षेत्र श्रवणबेलगोला से जुड़कर इस तीर्थ के विकास में अपना अहम योगदान दिया और इस तीर्थ को विश्वपटल पर पहचान दिलाई।

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