श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी की गुरुवार सुबह समाधि हो गई। स्वामी जी ने ही श्रीफल पत्रिका नाम ब्रह्मचारी चक्रेश (वर्तमान मुनि पूज्य सागर महाराज) को दिया था…
श्रवणबेलगोला। कर्मशील, सौम्य, मौन संत, जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी ही श्रीफल पत्रिका और श्रीफल जैन न्यूज वेबसाइट के प्रमुख प्रेरणा स्त्रोत थे। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज बताते हैं कि वर्ष 2001 से 2014 तक वह ब्रह्मचारी चक्रेश के रूप में श्रवणबेलगोला मठ में रहे थे। उनकी पठन-पाठन में रुचि स्वामी जी ने पहचानी।
उन्होंने 16 दिसंबर, 2005 में उनके हाथ में एक श्रीफल दिया और कहा कि तुम जो पत्रिका निकालना चाहते हो, उसका नाम श्रीफल रखो, क्योंकि इससे पवित्र वस्तु कुछ नहीं है। जैन धर्म में भी श्रीफल का विशेष महत्व है। तभी चक्रेश ने यह ठाना कि वह स्वामी जी के दिए इस नाम को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। इसके बाद ही उन्होंने श्रीफल पत्रिका निकालना शुरू किया। कालांतर में यही नाम श्रीफल जैन न्यूज वेबसाइट की प्रेरणा भी बना।













Add Comment