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यशोदय तीर्थ पर उमड़ रही भक्तजनों की भीड़ : महत्वाकांक्षा ही दुख का कारण है -मुनि सुधासागर महाराज


जितना हम दुख से दुखी नहीं हैं, उतना इच्छाओं के कारण हैं। हमारे पास मोटर साइकिल आ जाती है तो हम कार की इच्छा से मोटरसाइकिल का सुख नहीं ले पाते। हमारी महत्वाकांक्षा अनंत है। यह बात मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने प्रवचन के दौरान कही। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…


महरौनी( ललितपुर)। महत्वाकांक्षा ही दुख का मूल कारण है, इच्छाओं को छोटी कर लो, बस सब अच्छा ही अच्छा होगा। यह बात जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि इच्छाएं छोटी कर लो, सब अच्छा ही अच्छा होगा। जितना हम दुख से दुखी नहीं हैं, उतना इच्छाओं के कारण हैं। हमारे पास मोटर साइकिल आ जाती है तो हम कार की इच्छा से मोटरसाइकिल का सुख नहीं ले पाते। हमारी महत्वाकांक्षा अनंत है।

जिसकी पूर्ति की इच्छा में मनुष्य वर्तमान में दुखी रहता है। प्रत्येक व्यक्ति जो चाहता है, वो नहीं चाह पा रहा है, जो करना चाहता है, वो नहीं कर पा रहा है। यहीं से अवसाद की शुरुआत होती है। दुख कम है फिर भी दुखी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इच्छाओं को कम करो। प्रतिशोध की आग हमारे पुण्य को समाप्त कर देती है।

बह रही धर्म की गंगा

जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज और क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के यशोदय तीर्थ स्थल में आगवन के बाद नगर में धर्मगंगा बह रही है और गुरु वाणी से सभी लोग सिंचित हो रहे हैं। मुनिश्री के सानिध्य में प्रातःकाल जिन अभिषेक और शांतिधारा हुई। शांतिधारा करने का सौभाग्य मनोज कुमार सूरत, बाबूलाल-बीना, सौरभ सिलौनया, विकास ओसवाल, संतोष बादरी, सुबोध पठा को प्राप्त हुआ।

मुनिश्री को आहार कराने का सौभाग्य यशोदय तीर्थ कमेटी के अध्यक्ष प्रशांत सिंघई बंटी को प्राप्त हुआ। इस मौके पर नारेली राजस्थान, गोलाकोट, टीकमगढ़, भोपाल, ललितपुर की समाज ने मुनिश्री को श्रीफल अर्पित किया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश और नितिन शास्त्री ने किया। आभार यशोदय तीर्थ कमेटी के अध्यक्ष राजा चौधरी और राजू नुना ने व्यक्त किया।

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