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मानवता की बनीं मिसाल : साध्वी आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी के दर्शनों को उमड़ रहे श्रद्धालु


दिगंबर जैन मंदिर परेड चौराहा पर विराजमान जैन साध्वी सृष्टि भूषण माताजी के दर्शनों के लिए प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु अंचल और देश भर से आ रहे हैं। पढ़िये ये अजय जैन की विशेष रिपोर्ट… 


अंबाह। दिगंबर जैन मंदिर परेड चौराहा पर विराजमान जैन साध्वी सृष्टि भूषण माताजी इन दिनों नगर भर की आस्था का केंद्र बनी  हुई हैं। पूज्य माता जी के दर्शनों के लिए प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु अंचल और देश भर से आ रहे हैं। माता जी के प्रवचनों के जरिए युवा पीढ़ी धर्म के मार्ग की ओर अग्रसर हो रही है। जानकारी रहे कि जाति, धर्म,संप्रदाय, ऊंच-नीच, देश, प्रदेश की सीमाओं से मुक्त रहकर पूज्य माता जी सृष्टि भूषण जी ने अपना संपूर्ण जीवन लोकमंगल और विश्व कल्याण के कार्यो के लिए समर्पित किया है।

वर्तमान में वह शिक्षा, चिकित्सा और व्यसन मुक्ति के लिए लगातार अभियान चला रही हैं, जिसकी प्रेरणा से आज हजारों, लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। पूज्य माता जी को संयम, समता व साधना के सद्गुण अपने पूज्य गुरुदेव से सहज ही विरासत में प्राप्त हुए हैं। आप कुछ ही वर्षों में जैन-जैनेतर दर्शन की अधिकारी विद्वान बन गई हैं। आपकी प्रेरणा से चल रहे आदि सृष्टि कैंसर ट्रस्ट, जो कि कैंसर से पीड़ित मानव की सेवा विगत वर्षो से कार्य कर रहा है, से अनेक मरीज लाभान्वित हो रहे हैं। इसके साथ ही पूज्य माताजी के मार्गदर्शन में कोरोना काल में भी गरीबो को भोजन, पशुओं को चारा, पक्षियो को दाना, पानी और बंदरों एवं कुत्तों को रोटी एवं अन्य जन सेवा के कार्य बड़े पैमाने पर हुए थे। साध्वी श्री सृष्टि भूषण माताजी से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि हर इंसान का प्रथम कर्तव्य स्व:कल्याण के साथ-साथ प्राणी मात्र की सेवा भी है। पहला धर्म भूखे को भोजन कराना है।

गुरु मां ने अपने माध्यम से अपने सैकड़ो अनुयायियों को यही संदेश दिया है कि मेरा तो बस एक ही सपना भूख से न कोई तड़पे अपना, कहीं कोई बीमार न रहे । राजेंद्र भैया ने बताया कि मानव सेवा के साथ-साथ ये सभी कार्य भी, सबके सहयोग से निरन्तर चलते रहेंगे और दुनिया में समाज की एवं मानव जाति की सेवा में हम सभी अग्र सर रहेंगे।

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