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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कार्यक्रम :  जैन धर्म में दिया गया है महिलाओं को मान


श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर नाचाराम, हैदराबाद में कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भगवान आदिनाथ ने मसि यानी लेखन विधा तथा अन्य विधाओं को अपनी पुत्री ब्राह्मी तथा सुंदरी को सिखाया। इससे ही स्त्री शिक्षा तथा स्त्री सशक्तिकरण की शुरुआत हो गई थी। पढ़िए गौरव पाटोदी की विशेष रिपोर्ट…


हैदराबाद। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर नाचाराम, हैदराबाद में अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मीरा पाटोदी, कार्यकारणी सदस्य, अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन गुल्लिका अज्जि श्राविका संघ ने बताया कि प्रातः काल में गुलाबदेवी चित्तौड़ा, मीरा पाटोदी, चेतना कोठारी, सुनिता चित्तौड़ा, उर्मिला जैन, चंदा जैन, अंजु गंगवाल, डॉ. विजय पाटोदी, हितेष चित्तौड़ा, किरण वेद, अजीत कोठारी, गौरव जैन, कुबेर जैन, उमेश जैन, विवेक जैन, अरिहंत जैन, विकास जैन, दिनेश जैन, राहुल जैन तथा अन्य भक्तों ने श्री आदिनाथ भगवान, श्री चंद्रप्रभु भगवान तथा श्री शांतिनाथ भगवान का पंचामृताभिषेक एवं विश्व शांति के लिए शांतिधारा की।

सभी ने नित्य नियम पूजा करके प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर गुरुदेव, आचार्य श्री देवनंदी गुरुदेव तथा आचार्य श्री प्रमुख सागर गुरुदेव तथा 400 ग्रंथों की लेखिका भारत गौरव गणिनीप्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के 71वें दीक्षा दिवस पर, श्री पद्मावती माता, श्री क्षेत्रपाल बाबा का अर्घ्य अर्पण कर धर्म लाभ लिया। इस अवसर पर मीरा पाटोदी ने महिला सशक्तीकरण पर कहा कि अवसर्पिणी युग का प्रारंभ से ही स्त्री शक्ति के विकास एवं महत्व की सर्वाधिक महत्वपूर्ण आधार शिला है।

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ
भगवान ने अपनी गृहस्थावस्था में भी भोगभूमि से कर्मभूमि में परिणत भरत क्षेत्र में व्याकुलित जनता को षटकर्म का उपदेश देकर जीवन निर्वाह की कला से परिचित कराया। प्रभु ने स्त्री जाति के महत्व को उस युग में रेखांकित करते हुए मसि यानी लेखन विधा तथा अन्य विधाओं को अपनी पुत्री ब्राह्मी तथा सुंदरी को सिखाया। इससे ही स्त्री शिक्षा तथा स्त्री सशक्तिकरण की शुरुआत हो गई थी। आदिपुराण तथा अन्य प्रतिष्ठा ग्रंथों में तथा अन्य सभी धर्मों में मांगलिक क्रियाओं की शुरुआत सौभाग्यवती महिलाएं ही करती हैं। वेदी शुद्धी का कार्य महिलाओं द्वारा किया जाता है। जीवन के अंकुरण तथा उसके विकास में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण है।

लाखों-करोडों अरिहंतों, तीर्थंकरों, साधु-संतों, समाज को, श्रावक-श्राविका रत्नों को अपनी कुक्षी से जन्म देने वाली नारी ही है। मां, बहन, पत्नी, मित्र, सास आदि सारा रूप नारी का ही है। प्रेम, त्याग, ममता, सदाचार, चरित्र, वीरता, साहस, दृढ़ता, संयम, धैर्य आदि रत्नों से नारी का जीवन सजा है। आज के वर्तमान युग में भी महिलाएं राष्ट्राध्यक्ष, तीनो सेनाओं में, पुलिस बल के महत्वपूर्ण पदों पर, वैज्ञानिक, अनुसंधान, अंतरिक्ष, वित्तिय तथा अन्य महत्वपूर्ण विभागों में पदासीन हैं। सियाचिन तथा अन्य भारतीय सीमाओं पर महिलाएं उच्च पद पर रहकर अपना कर्तव्य निभा रही हैं। साक्षरता का प्रमाण महिलाओ में ज्यादा है। कार्यक्रम के पश्चात सभी के लिए चित्तौड़ा परिवार द्वारा अल्पाहार की व्यवस्था रखी गयी थी ।

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