जैन भ्रात संघ की ओर से डॉ. पं. पन्नालाल साहित्याचार्य जी की 112 वीं जयंती पर साहित्याचार्य मार्ग नमकमंडी में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि विधायक शैलेन्द्र जैन, मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ अमर जैन, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर सुखदेव बाजपेई एवं डा.किरण आर्या रहीं। पढ़िए मनीष विद्यार्थी की रिपोर्ट…
सागर। जैन भ्रात संघ की ओर से डॉ. पं. पन्नालाल साहित्याचार्य जी की 112 वीं जयंती पर साहित्याचार्य मार्ग नमकमंडी में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि विधायक शैलेन्द्र जैन, मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ अमर जैन, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर सुखदेव बाजपेई एवं डा.किरण आर्या रहीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि साहित्य साधना के साधक पं. डॉ.पन्नालाल साहित्याचार्य जी को मरणोपरांत पद्म श्री पुरस्कार दिया जाना चाहिए। पं. पन्नालाल जी वास्तव में देश की धरोहर थे जिन्होंने 80 से अधिक ग्रंथों पर टीका, व्याख्या, तथा 25 से अधिक मौलिक रचनाएं समाज को दी। उनमें ज्ञान व चरित्र का अनोखा संगम था जो वर्तमान में दुर्लभ ही मिलता है। एक सरल एवं यशस्वी सरस्वती आराधक के रूप में साहित्याचार्य जी की सेवाओं को इतिहास सदैव स्मरण रखेगा।
मुख्य वक्ता डॉ. अमर जैन ने कहा जिस प्रकार सादा पानी मंदिर में जाकर पवित्र जल हो जाता है, नारियल श्रीफल हो जाता है, चावल अक्षत और पुष्प हो जाते हैं उसी प्रकार पंडित पन्नालाल साहित्याचार्य जी के विद्यार्थी उनके संपर्क में आने के बाद उत्तम श्रावक, साधु और आर्यिका बनकर आत्म साधना कर रहे हैं। पंडित जी के पास चरित्र का पारस पत्थर था जो लोहे जैसे विद्यार्थियों को भी सोना बना देता था। कर्तव्यनिष्ठा के आलोक में पंडित जी साहब का जीवन इतना समय का पाबंद था कि उनकी दैनिक दिनचर्या से लोग अपनी घड़ी मिला लिया करते थे, व्यर्थ में खोने के लिए उनके पास एक भी पल नहीं था। उनका दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित होना लौकिक जगत के लिए तो सुखद था लेकिन पारलौकिक जगत के पंडित जी जीवन भर सल्लेखना के पथिक रहे।

विशिष्ट वक्ता डॉ सुखदेव बाजपेई ने कहा पंडित जी से न मिल पाना उनके जीवन का दुर्भाग्य है। साहित्य के ऐसे धुरंधर थे जो इस जगत में यदा-कदा ही जन्म लेते हैं। जिन लोगों ने उन्हें देखा है उनसे पढ़ा है उनको देखकर मैं उनके विषय में अनुमान लगा सकता हूं। डा किरण आर्या ने उन्हें साहित्य जगत के शिरोमणि की उपाधि से विभूषित किया। मुरैना से पधारे पंडित जी के शिष्य हरिश्चंद्र जी ने कहा पंडित जी ने हम जैसे अनेक विद्यार्थियों का जीवन धन्य कर दिया। पंडित राजकुमार शास्त्री जी ने पंडित जी के साथ विद्यार्थी जीवन के अनुभव सुनाए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अजित मलैया ने कहा कि पंडित जी धर्म और साहित्य के संवाहक थे तथा उनके दिए संस्कार आज भी उनकी संतति में देखने में मिलते हैं। कार्यक्रम को मुकेश जैन ढाना तथा अनिल जैन नैनधारा ने भी संबोधित किया। डॉ. नलिन जैन ने पंडित जी के जीवन पर मौलिक कविता पाठ किया।
कार्यक्रम में सुखदेव बाजपेई तथा किरण आर्या की लिखित पन्नालालियम पुस्तक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन अशोक पिडरुआ तथा आभार डॉ. राजेश जैन (साहित्याचार्य जी के पुत्र एवं शिशु रोग विशेषज्ञ) ने माना। कार्यक्रम में ब्रह्मचारी राकेश जैन, संतोष जैन घड़ी, चक्रेश जैन, राकेश राय, राजेश केशरवानी, दिनेश मलैया, डॉ अरुण सराफ, श्रीमंत सेठ सुरेश जैन, कैलाश दाऊ सहित जैन पंचायत सभा के सदस्य सहित बालक हिल व्यू अध्यक्ष आलोक जैन, महामंत्री अरविंद जैन, पूर्व अध्यक्ष अजय सराफ जी, डॉ वीके जैन, पं. मनीष विद्यार्थी शाहगढ़, पंडित शोभालाल लाल जी, टीआई मुकेश सिंघई जी सहित शहर एवं समाज के गणमान्य अनेकों महिला एवं पुरुष उपस्थित रहे।













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