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परीक्षा पर चर्चा: भविष्य में शिक्षा की चुनौतियां विषय पर राजेंद्र जैन ने प्रधानमंत्री को भेजे विचार


सारांश

परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम के लिए शासकीय हाई स्कूल बासवा में पदस्थ शिक्षक राजेंद्र महावीर जैन ने भविष्य में शिक्षा की चुनौतियां विषय पर अपना सुझावात्मक निबंध 1500 शब्दों में शिक्षा मंत्रालय को प्रेषित था। पढ़िये राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


सनावद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी लगातार परीक्षा पर चर्चा 27 जनवरी को की । इसके लिए देश भर के शिक्षकों से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने पांच विषयों पर सुझाव मांगे थे। शासकीय हाई स्कूल बासवा में पदस्थ शिक्षक राजेंद्र महावीर जैन ने भविष्य में शिक्षा की चुनौतियां विषय पर अपना सुझावात्मक निबंध 1500 शब्दों में प्रेषित किया था, इसके लिए मंत्रालय द्वारा जैन को प्रतिभागी प्रमाण पत्र प्रेषित किया गया है। उन्हें परीक्षा पर चर्चा की किट भी प्रदान की जाएगी।

विधानसभा में दे चुके हैं वक्तव्य

उल्लेखनीय है कि राजेंद्र जैन विगत 25 वर्षों से शैक्षिक दायित्व का कुशलता से निर्वहन कर रहे हैं। बोर्ड परीक्षाओं के परीक्षा परिणाम के बाद विद्यार्थियों द्वारा प्रदेश में बढ़ती आत्महत्याओं को रोकने के लिए गठित समिति के समक्ष जैन मध्यप्रदेश की विधानसभा के कैबिनेट कक्ष में मई 2016 में 20 मिनट का अपना वक्तव्य देकर उल्लेखनीय सुझाव दे चुके हैं। तत्कालीन शिक्षा मंत्री व कैबिनेट समिति द्वारा उनके सुझाव को सराहना मिली थी।

एक देश एक शिक्षा होनी चाहिए

मोटिवेशनल स्पीकर एवं लेखक राजेंद्र जैन का मानना है कि हमारा देश में अनेक तरह के परीक्षा बोर्ड हैं। वहीं देशव्यापी प्रतियोगी परीक्षाओं का आधार एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम होता है, जिससे 28 राज्य बोर्डों का पाठ्यक्रम अलग होने से वे प्रतियोगी परीक्षाओं से पिछड़ जाते हैं।

दिये कई सुझाव

प्रधानमंत्री को प्रेषित चुनौतियों में उन्होंने अनेक सुझाव प्रेषित किए हैं, जिनमें एक देश एक बोर्ड के सुझाव के साथ शिक्षकीय कार्य को गरिमामय बनाने व शासकीय विद्यालयों को बचाने के लिए आरटीई के तहत 25% प्रतिशत प्रवेश निजी विद्यालयों में रोकने व कक्षा आठवीं तक अनुत्तीर्ण ना करने की नीति को बंद करने के साथ मातृभाषा में शिक्षण कराने जैसे सुझाव शामिल हैं वहीं शिक्षा का बजट बढ़ाने व उसे पूरी तरह से खर्च करने की चुनौतियां बताते हुए जैन का कहना है कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए भारत सरकार ने विभिन्न योजनाएं बनाई हैं, जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी उल्लेखनीय प्रयास है।

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