सारांश
आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रवचन के दौरान कहा कि संविधान में समय-समय पर आवश्यकता के अनुसार संशोधन होते हैं लेकिन जैन धर्म में देव, शास्त्र, गुरु द्वारा बनाए गए नियम-संविधान में कोई परिवर्तन नहीं होता है। देश तंत्र के अनुसार चलता है किन्तु जैन धर्म आगम के अनुसार चलता है। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट
मदनगंज-किशनगढ़। जिनेन्द्र पंचकल्याणक महामहोत्सव में वात्सल्य वारिधि व राष्ट्र गौरव आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि 26 जनवरी को देश चलाने के लिए संविधान लागू किया गया। संविधान में समय-समय पर आवश्यकता के अनुसार संशोधन होते हैं लेकिन जैन धर्म में देव, शास्त्र, गुरु द्वारा बनाए गए नियम-संविधान में कोई परिवर्तन नहीं होता है। देश तंत्र के अनुसार चलता है किन्तु जैन धर्म आगम के अनुसार चलता है।
तीर्थंकर को आहार की आवश्यकता नहीं
वर्धमान सभागार में आयोजित प्रवचन सभा में आचार्यश्री ने कहा कि तीर्थंकर भगवान को आहार की जरूरत नहीं होती है फिर भी तीर्थंकर भगवान आहार के माध्यम से भविष्य का संविधान बनाते हैं कि मुनिराज किस प्रकार आहार करेंगे, वे किस विधि से आहार लेंगे। वीतरागिता के तंत्र में कोई परिवर्तन नहीं होता है। अतः सभी रत्नत्रय रूपी वीतरागिता को प्राप्त करने के लिए सबको पुरुषार्थ करना चाहिए। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र रत्नत्रय के अभाव में प्राणी संसार में परिभ्रमण कर रहे हैं। सबसे पहले 8 कर्मों का आश्रव रोकना होगा। इसके लिए संवर तत्व अर्थात जिस प्रकार बांध बनाकर पानी को रोका जाता है, उसी प्रकार कर्मों के आश्रव को तप और संयम रूपी बांध बनाकर कर्मों की निर्जरा तप संयम और साधु जीवन के माध्यम से करना होगी।

मोह रूपी अंधकार दूर करें
आचार्य श्री ने कहा कि अंधकार को जिस प्रकार दूर करने के लिए दीपक के प्रकाश से अंधकार को दूर किया जाता है, उसी प्रकार आपको मोह रूपी अंधकार को ज्ञान रूपी दीपक के माध्यम से दूर करना होगा। इसके लिए संयम धारण कर निर्वाण को प्राप्त किया जा सकता है। मनुष्य भव में 84 लाख योनि से छुटकारा पाने का यही उपाय है, यही मंगलकारी है। इससे आप परमात्मा बन सकते हैं।
देव-शास्त्र-गुरु की भक्ति करें
आचार्यश्री ने कहा कि हमारे देव-शास्त्र-गुरु परम आराध्य हैं। इनकी भक्ति कर पाप कर्मों को नष्ट कर सकते हैं। नारी पर्याय से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है, इसके उत्तर में आचार्यश्री ने कहा कि सम्यक दर्शन, ज्ञान चरित्र जो धर्म है, उसका समीचीन पालन करके आप नारी पर्याय से छुटकारा पा सकते हैं। प्रवचन के दौरान एक श्रावक ने प्रश्न किया कि सर्वश्रेष्ठ गति कौन सी है तो आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य गति ही श्रेष्ठ है क्योंकि इससे आप संयम धारण करके मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं।
वर्ष 2023 को वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर का चातुर्मास किस नगर में होने संबंधी संजय पापड़ीवाल के प्रश्न पर आचार्यश्री ने उत्तर देते हुए कहा कि चातुर्मास स्थापना की नियत तिथि को संघ जिस नगर में होगा, वहीं चातुर्मास स्थापित करेंगे। वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार के राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि वात्सल्यमय जीवन दर्शन प्रदर्शनी का समापन भी हुआ।
केबिनेट मंत्री ने लिया आशीर्वाद
आचार्य वर्धमान सागर महाराज से आशीर्वाद लेने के लिए केबिनेट मंत्री लालचंद कटारिया भी आरके कम्यूनिटी सेंटर पहुंचे। केबिनेट मंत्री ने श्रीफल भेंट कर आचार्यश्री से आशीर्वाद लिया। आरके मार्बल समूह के चेयरमैन अशोक पाटनी, मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन पंचायत के अध्यक्ष विनोद पाटनी, मंत्री सुभाष बड़जात्या, संजय पापडीवाल, विमल बड़जात्या, राकेश पाटनी ने उनका स्वागत किया।
ये कार्यक्रम हुए
प्रतिष्ठाचार्य संहितासूरि हंसमुख जैन के निर्देशन में प्रातः ध्यान व आशीर्वाद सभा, श्री जिनाभिषेक एवं नित्यार्जन का आयोजन किया गया। वर्धमान सभागार में वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के मंचासीन होने के बाद चित्र अनावरण व दीप प्रज्ज्वलन विधायक सुरेश टाक ने किया। पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य पारसमल, चेतनप्रकाश, तिलोक, पवन पांड्या परिवार को मिला।
वहीं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य रामज्योति अनिल-मुकेश सेठी कुचील वालों को मिला। कार्यक्रम के दौरान वात्सल्य भोज पुण्यार्जक अजीत कुमार, रवि कुमार, राजकुमार बाकलीवाल बीर वालों का स्वागत अभिनंदन किया गया। सांयकालीन आरती करने का सौभाग्य पारसमल, चेतनप्रकाश, तिलोक, पवन पांड्या परिवार को प्राप्त हुआ। कृष्णापुरी निवास स्थान से हाथी और बग्घियों में सवार होकर पांड्या परिवार के लोग वर्धमान सभागार पहुंचे जहां पर श्रीजी की महाआरती की गई। शास्त्र सभा के बाद भजन संध्या का आयोजन किया गया।













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