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61 वा महापारणा महामहोत्सव आज से , तैयारी पूरी: राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति लोकसभा अध्यक्ष जी आमंत्रित 29 को विशेष योग सभा,


सारांश

अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज की मौन साधना के अनवरत 557 दिन सिंह निष्क्रिय व्रत पूरा होने पर आज से विशेष महापारणा महामहोत्सव की शुरू होगा । मधुबन क्षेत्र में आयोजित इस समारोह में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष समेत तमाम हस्तियों को आमंत्रित किया गया है। कोडरमा से राजकुमार जैन की पढ़िए यह खास रिपोर्ट।


अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज के 557 दिन के बाद 61 वॉ महापारणा महोत्सव की तैयारी पूर्ण कर ली गई है सम्मेदशिखर जी- जैन समाज गुरुभक्त परिवार लगा है अंतर्मना के महापारणा महाप्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारी में, 7 दिनों तक पूरे मधुबन में किसी के घर में चूल्हा नहीं जलेगा -अब दिनों की नहीं, घंटों की बात रह गई है । आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज की मौन साधना के अनवरत 557 दिन और सिंह निष्क्रिय व्रत के पूरे होने में। जी हां 21 जुलाई 2021 से शुरू हुआ अब 28 जनवरी 23 को यानी शुक्रवार को पूरा हो रहा है और आज पूरा देश उसे विशेष महापारणा महाप्रतिष्ठा महामहोत्सव बनाने के लिए जुट चुका है और तैयारियां भी लगभग पूरी होकर, अंतिम चरण में है।

पिछले कुछ समय में यह सचमुच महाप्रणा का महोत्सव देश का सबसे बड़ा महोत्सव बनने जा रहा है और इसके साक्षी बनाने के लिए कमेटी द्वारा भारत के राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू , उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला जी के साथ, अनेकों बड़ी हस्तियों को आमंत्रित किया गया है । यही नहीं योग गुरु बाबा स्वामी रामदेव ना केवल इस ऐतिहासिक समारोह के साक्षी बनेंगे, बल्कि 29 जनवरी को एक विशेष योग सभा का आयोजन कर रहे हैं ।

जैन समाज ही नहीं , पूरा प्रशासन भी अलर्ट मोड में है और सभी तरह की सुविधाएं , आने वाले यात्रियों को देने के लिए पूरी तरह जुड़ा हुआ है । ध्यान रहे आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी ने, इस साधना के काल में बहुत बड़ा समय स्वर्ण भद्र कूट पर बिताया, जहां पर सर्दियों में तापमान शून्य के आसपास या नीचे तक चला जाता है । ऐसे में दिगंबर संत की तपस्या की पराकाष्ठा, व्रत के साथ।

जैसे आसमान को भी नीचे आने को आतुर कर देती है, धरा अपनी बाहें खिला देती है , सूरज भी अपनी पूरी कोशिश करता है कि ऐसे संत को में अपना ताप दे सकूं, पर बर्फीली हवाएं भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर , उस तापमान को बढ़ने से रोकती रही हैं। ऐसे में सचमुच यह मौन साधना , उपवास की श्रंखला, जिसमें 557 दिनों में सिर्फ 61 दिन पारणा होती है और 496 दिन उपवास रहता है ।

कहा जाता है इस महापारणा महाप्रतिष्ठा में 7 दिनों तक इस क्षेत्र में पूरे मधुबन में किसी के घर में चूल्हा नहीं जलेगा, बल्कि हर दिन सुबह और शाम का भोजन, सारे लोगों के लिए एक ही जगह पर बनेगा , ऐसी व्यवस्था भी कमेटी द्वारा की जा रही है, जो शायद आज तक ऐसी नहीं हुई

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