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बेजोड़ कला : इन्होंने बनाया है छूलती छत वाला मंदिर, हुआ सम्मान


सारांश

चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर को शिल्पकला के उत्कृष्ट तीर्थ के रूप में अलंकृत करने के लिए उमेश गोयल का अभिनंदन किया गया। सम्मान लेने के लिए उमेश गोयल, श्यामसुंदर अग्रवाल, साहिल सोमानी, मेहुल मालपानी, सौरभ गुप्ता एवं गिरीश गोयल मौजूद थे। पढ़िए श्याम मनोहर पाठक की रिपोर्ट…


मदनगंज-किशनगढ़। तेली मोहल्ला स्थित चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर को शानदार भव्यता और नवीनता देने वाले निर्माणकर्ता गोयल स्टोनेक्स, किशनगढ़ के उमेश गोयल का बुधवार को पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत चल रहे कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट की ओर से श्वेत संगमरमर की धवलता से पुर्ननिर्मित चंद्रप्रभु दिव्य जैन मंदिर के नवीन भव्य एवं दिव्य स्वरूप को वास्तविकता के धरातल पर साकार रूप प्रदान करने में गोयल का अतुलनीय योगदान बताते हुए कभी विस्मृत नहीं होने की बात कही गई। साथ ही बताया गया कि ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को आगामी सहस्त्र वर्षों तक संरक्षित करने व इस जिन मंदिर को शिल्पकला के उत्कृष्ट तीर्थ के रूप में अलंकृत करने के लिए गोयल का हार्दिक अभिनंदन किया गया। वास्तुशिल्प में अपार प्रवीणता से यह जिन मंदिर अमूल्य धरोहर के रूप में संरक्षित हो गया है। सम्मान लेने के लिए उमेश गोयल, श्यामसुंदर अग्रवाल, साहिल सोमानी, मेहुल मालपानी, सौरभ गुप्ता एवं गिरीश गोयल मौजूद थे। यह सम्मान चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष संदीप पाटनी, मंत्री इंदु पाटनी, प्रबंधक ट्रस्टी सुरेंद्र दगड़ा ने दिया।

दीवारों पर अद्भुत काम
उमेश गोयल ने बताया कि मंदिर की दीवारों पर पत्थर के क्लेडिंग (आवरण) का जबरदस्त काम किया गया। सीमेंट की दीवारों पर पत्थर के आवरण के अद्भुत काम को देखकर प्रेम मंदिर की टीम भी हैरत में रह गई। यहां पिछले दस साल में सैंकड़ों कुशल कारीगरों ने जबरदस्त काम किया। सिंह द्वार आरके मार्बल के माता चतर देवी पाटनी के नाम से बनाया गया है। सुधासागर, प्रमाण सागर महाराज ने भी मंदिर निर्माण के दौरान अवलोकन कर कार्य पर संतुष्टी जताई थी। सभी मोरवर्ड माइंस के पत्थरों के ब्लॉक पर राजस्थान, उड़ीसा और उत्तरप्रदेश के कुशल कारीगरों ने शानदार कलाकृतियां उकेरीं। गोयल बताते हैं कि यह कार्य प्रभावशाली इसलिए हुआ कि मंदिर बनवाने और बनाने वालों में आपसी समन्वय, सामंजस्य रहा। उन्होंने इस भाव से काम किया कि आने वाली पीढ़ियां भी इसे याद करें।

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