ये आजीविका का नहीं, हमारे आध्यात्म का विषय है

श्रीफल जैन न्यूज़ संवाददाता – सम्मेद शिखर पर आपके आंदोलन को कुछ लोग कह रहे हैं कि आप लोग क्षेत्र के लोगों का जीवन में बदलाव नहीं चाहते । विकास होगा तो सबको फायदा मिलेगा ।
प्रकाश बड़जात्या ( राष्ट्रीय महामंत्री,भारतीय दिगंबर जैन महासभा) देखिए, वहां जैन समुदाय के लोग क्षेत्र के विकास को देखने नहीं बल्कि अपने आध्यात्मिक विकास के लिए जाते हैं । आज से नहीं, हजारों सालों से, ये पर्वतराज हमारे तीर्थंकरों की तपश्चर्या का केन्द्र रहे हैं । आजीविका नहीं आध्यात्म मुद्दा है ।
श्रीफल जैन न्यूज संवाददाता – सरकारों की क्या ये जिम्मेदारी नहीं है कि वो क्षेत्र के विकास की बात करे ?
प्रकाश बड़जात्या *(राष्ट्रीय महामंत्री,भारतीय दिगंबर जैन महासभा)* – सरकार करे, कौन रोक रहा है । हम सिर्फ इतना कह रहे हैं कि ये हमारी हजारों साल पुरानी आस्था का केन्द्र है । जैन समाज अल्पसंख्यक है । देश के बहुत कम स्थानों में हम अपने गतिरोध रखते हैं । गिरनार जी से लेकर बालाजी तक जैन समाज की मान्यताएं हैं । इस कड़ी में जब सम्मेद शिखर का रूप परिवर्तन हो जाएगा तो इसे कैसे स्वीकार कर लें ।
श्रीफल जैन न्यूज़ संवाददाता-आप कह रहे हैं कि सरकार सब कुछ आप लोगों पर छोड़ दे, जैसा चल रहा है, चलने दें. वहां के लोगों का क्या होगा, जो निवास करते हैं ।
प्रकाश बड़जात्या – (राष्ट्रीय महामंत्री,भारतीय दिगंबर जैन महासभा) – सरकार के दखल से पहले भी तो वहां लोग रह रहे हैं, जैन श्रद्धालू वहां आ-जा रहे हैं । मुद्दा यह है कि झारखंड सरकार बिना कुछ सोचे-विचारे वो काम कर गई जो आपस में सहमति बनाकर किया जा सकता था । बताइए किसी के धर्म स्थान को बिना उनसे चर्चा किए गजट नोटिफिकेशन से बदला गया है कभी ? जैन समुदाय के साथ झारखंड और केन्द्र सरकार दोनों से ये कर लिया और पूछा तक नहीं । हमारा यही विरोध है ।
श्रीफल जैन न्यूज़ संवाददाता- अब आगे क्या करेंगे ? कैसे रास्ता निकलेगा ?
प्रकाश बड़जात्या (राष्ट्रीय महामंत्री,भारतीय दिगंबर जैन महासभा)- इस मामले में तो सरकार को झुकना होगा । सारी बातें सरकारों की हम मानते आ रहे हैं । चाहे व्यापार के रोज बदले नियम हों या कुछ और..लेकिन अब बात हमारी आस्था पर जा टिकी है । हमारे तींर्थंकरों के शिखर को बचाने की बात है । हम इस फैसले को बदलवाएंगे । हिंसा में तो किसी जैन का विश्वास है ही नहीं, लेकिन आमरण अनशन, आंदोलन से बात आगे बढ़ेगी । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला जी के फोन के बाद झारखंड में सरकार झुकी है । लेकिन फैसला बदलने में वक्त लगता है । हम चाहते हैं कि ये वक्त न लगे और जैसे गजट नोटिफिकेशन जल्दबाजी में जारी कर दिया, उसी तरह से वापस भी ले लिया जाए ।












