ललितपुर (राजीव सिंघई)। निर्यापक श्रमण 108 श्री सुधा सागर जी महाराज के संघ के एलक श्री धैर्य सागर जी महाराज मंगलवार को अन्नपूर्णा सेवा संघ द्वारा संचालित अन्नपूर्णा भोजन शाला में दोपहर की भोजन चर्या के दौरान पहुंचे। यहां पर उन्होंने उपदेश देते हुए कहा कि आप भले ही किसी भी धर्म के हों लेकिन आपका धर्म भी आपको यह सिखाता है कि जूते-चप्पल उतार कर और पूरी शुद्धि के साथ आप भोजन करें। भोजन का कभी अपमान ना करें। उतना ही लो थाली में व्यर्थ ना जाए नाली में।
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जो लोग आप को भोजन करा रहे हैं, वे लोग न जाने कितने जतन करके आपके लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। उनका सम्मान आपके द्वारा भोजन नहीं छोड़ना है। इससे आप किसी अन्य व्यक्ति का भी पेट भरते हैं, जिससे आपको भी पुण्य लगता है। साथ में किसी भी व्यसन में पड़कर आप इस प्रकार के हालात पैदा कर लेते हैं कि आपको भोजन की समस्या का सामना करना पड़ता है।
इसलिए सभी प्रकार के व्यसन का आप सभी लोगों को त्याग करना चाहिए। उन्होंने सभी दानदाता और अन्नपूर्णा सेवा संघ के कार्य सेवकों को दोनों हाथों से आशीर्वाद प्रदान किया तथा भोजन देख कर कहा कि इतना शुद्ध भोजन निश्चित रूप से मरीजों के लिए भी लाभदायक है और अन्य भी जो लोग खा रहे हैं, उनके लिए भी लाभदायक है।












