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विदवास शासकीय हाईस्कूल अब न्यायमूर्ति श्रीमती विमलादेवी जैन के नाम से जाना जाएगा

विदवास शासकीय हाईस्कूल अब न्यायमूर्ति श्रीमती विमलादेवी जैन के नाम से जाना जाएगा

 

सागर/भोपाल.अनुपमा- राजेन्द्र जैन “महावीर”। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में जैन समाज की पहली न्यायाधीश बनने का सौभाग्य प्राप्त करने वाली न्यायमूर्ति श्रीमती विमलादेवी जैन की जन्मभूमि विदवास जिला सागर स्थित शासकीय हाईस्कूल अब न्यायमूर्ति श्रीमती विमलादेवी जैन शासकीय हाईस्कूल विदवास, जिला सागर (म.प्र.) के नाम से जाना जाएगा। सागर के कलेक्टर श्री दीपक आर्य ने विगत माह उक्त आशय का आदेश जारी कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि श्रीमती विमला जी ने जुलाई 1957 से अप्रैल 1962 तक इस विद्यालय में कक्षा 5वीं तक अध्‍ययन किया है। आपके पिता श्री सुन्‍दरलाल जी अनेक वर्षों तक ग्राम पंचायत विदवास के सरपंच रहे हैं। उनकी पूज्य माताजी श्रीमती सुमतिरानीजी के धार्मिक संस्कार विमलाजी के जीवन की उन्नति में हर समय सहायक रहे हैं। जैन समाज के लिए गौरवपूर्ण आदेश की देशभर में सराहना हो रही है। जैन समाज भी म.प्र.शासन के प्रति अपना आभार व्यक्त कर रहा है।

 

 

 

न्यायमूर्ति श्रीमती विमलादेवी जैन एक परिचय

संपूर्ण जैन समाज का गौरव है कि 11 जून 1952 को सागर जिले के छोटे से ग्राम विदवास में जन्मीं विमलाजी का विवाह मात्र 16 वर्ष की आयु में श्री सुरेशजी आईएएस के साथ हुआ। श्री सुरेशजी ने उन्हें पूर्ण सहयोग देकर एम.ए., एल.एल.बी. और बी.एड. कराया। सन् 1978 में प्रतिभा संपन्न विमलाजी ने म.प्र.न्यायिक सेवा में प्रवेस कर व्यवहार न्यायाधीश का पद प्राप्त किया।

अपने सारगर्भित निर्णयों व संविधान की व्याख्या का दायित्व निभाते हुए आप जिला न्यायाधीश से म.प्र.उच्च न्यायालय जबलपुर में न्यायाधीश बनीं। जैन समाज से आने वाली वह प्रथम महिला हैं जिन्हें संपूर्ण भारतवर्ष के जैन समाज में इस पद पर पहुंचने का गौरव प्राप्त हुआ। 36 वर्ष की न्यायिक सेवा में आपने जो कार्य किये, वह न्यायिक जगत में ‘मील का पत्थर’ हैं।

अपने बच्चों के साथ खुद पढ़कर इस उच्च पद पर पहुंचने वाली श्रीमती विमलाजी महिला जगत के लिए आदर्श उदाहरण हैं। संपूर्ण परिवार जैन जगत के लिए अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। श्री सुरेशजी जैन, जैन जगत के वे आदर्श प्रशासनिक अधिकारी रहे जिन्होंने इतिहास बनाया है। आज भी दंपत्ति की सेवाएं समाज को प्राप्त हो रही हैं।

उम्र के आठवे दशक में श्रीमती विमलाजी-सुरेश जी पूर्ण रूप से सामाजिक,धार्मिक कार्यों में पूर्ण संलग्न हैं। देशभर के प्रमुख समाजजनों ने विद्यालय का नामकरण न्यायमूर्ति विमलाजी के नाम से किए जाने को समाज व प्रदेस का गौरव निरूपित करते हुए म.प्र.शासन का आभार माना है।

न्यायमूर्ति श्रीमती विमलाजी के परिजनों ने इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जन्मभूमि के विद्यालय का वे शीघ्र अवलोकन कर वहां की सुविधाओं का आंकलन करेंगे व विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए जितनी भी सुविधाएं दी जा सकती हैं, वह प्रदान करेंगे।

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