राम और रावण के जीवन का उदाहरण देकर समझाया
25 अक्टूबर को भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव पर आयोजन करें
ललितपुर.राजीव जैन सिंघई | श्री अभिनन्दनोदय अतिशय तीर्थ में श्रमण निर्यापक मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने धर्मप्रेमियों को उपदेश देते हुए कहा है कि देखने में आता है कि धर्मात्मा व्यक्ति तो आज दुखी दिखता है, और जो पापाचार में रत है वह सुखी नजर आता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रभु राम का जीवन देख लो। वह जीवन पर अभाव में जिए, अंत में वह मोक्ष गए और रावण
जिन्दगी भर सुखी दिखा और अंत में नरक में गया। राम झोपड़ी में और रावण महलों में रहा। रावण सोने की लंका और राम जंगलों में रहे। आयोजन में पंचायत अध्यक्ष अनिल अंचल, महामंत्री डा. अक्षय टडैया, प्रबंधक राजेन्द्र थनवारा, पंकज मोदी,ब्र.मनोज भैया आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

धार्मिक आयोजन समिति संयोजक मनोज बबीना ने बताया कि आगामी 25 अक्टूबर को भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव के उत्सव में लाडू और दोपहर में पूजाघर पर गोतम गणधर के केवल ज्ञान के उपलक्ष्य में पूजा का आयोजन करें। मुनि श्री ने देवगढ़ जी एवं सेरोन जी में भी विशेष पूजा एवं लाडू चढ़ाने के विशेष आयोजन के लिए आशीर्वाद दिया है।
इसके पूर्व प्रातःकाल मूलननायक अभिनंदनाथ भगवान का श्रावकों ने अभिषेक किया। इसके उपरान्त मुनि श्री के मुखारविन्द से शान्तिधारा का सौभाग्य सौरभ प्रियंका सरोज बांझल परिवार नोएडा, शिखरचंद नवीन पठावाले परिवार, श्रेयांस प्रिया गिरीश पूना महाराष्ट्र एवं अन्य श्रावक श्रष्ठियों को प्राप्त हुआ। तदुपरान्त श्रावक श्रेष्ठि परिवारों ने आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं मुनि श्री का पादप्रक्षालन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
मुनिश्री के आशीर्वाद से शनिवार को भारतवर्षीय तीर्थक्षेत्र श्री देवोदय तीर्थ देवगढ़ जी कमेटी के महामहिम संरक्षक पद को सुशोभित करने का सौभाग्य सुरेशचंद सीए, संजीव जैन सीए, रचना जैन परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिश्री ने इस ऐतिहासिक क्षेत्र पर पर्यटन एवं धार्मिक अनुष्ठानों में वृद्धि होने का आशीर्वाद दिया।
शनिवार को निर्यापक मुनि श्री सुधासागर महाराज को आहार एवं पडगाहन स्वतंत्र स्वर्णिम मोदी एवं सुरेशचंद संजीव सीए रचना सीए परिवार, मुनि पूज्यसागर महाराज को आहार एवं पडगाहन जयकुमार वेरायटी कटपीस परिवार, ऐलक धैर्यसागर को आहार एवं पडगाहन प्रकाश मयूर परिवार एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज को आहारदान एवं पडगाहन श्रेयांश कल्यानपुरा परिवार को मिला।












