झुमरीतिलैया. राजकुमार अजमेरा । श्री दिगम्बर जैन समाज के नेतृत्व में कोडरमा में चल रहे चातुर्मास में परम पूज्य मुनि श्री विशल्य सागर जी महाराज की प्रवचन श्रृंखला में स्वभाव से जीवन के उत्थान के बारे में चर्चा हुई। मुनि श्री ने कहा कि कुशल व्यवहार आपके जीवन का आईना है।इसका आप जितना अधिक इस्तेमाल करेंगे, आपकी चमक उतनी ही बढ़ जाएगी। अगर आप चाहते हैं कि चमत्कार हो, तो अपने व्यवहार को ठीक करें। अच्छा और विन्रम व्यवहार ही आपको संसार में नई पहचान देगा। सबको प्रेम और सम्मान दीजिए, यह आपकी ओर से दिये जाने वाले महंगे से महंगे तोहफों से बेशकीमती है।
विन्रमता को जीवन रूपी बगिया में लाइए, जिसमें सुंदर-सुंदर पुष्प खिल सकें। मुनि श्री ने यह भी कहा कि समय का मूल्य पहचानिये। सार्थक कामों में खर्च किया गया समय तिजोरी में सुरक्षित हो जाता है, वहीं बातों और गप्पों में हांका गया समय कूड़ेदान में चला जाता है। उदासी को जीतिए, नहीं तो आप संसार के सुंदर उपवन में चिंता ,तनाव और अवसाद के कांटों से भरे हुये बबूल भर बनकर रह जाएंगे। प्रलय आने पर समुद्र भी अपनी मर्यादा छोड़ देता है लेकिन सज्जन लोग महाविपत्ति आने पर भी मर्यादा नहीं छोड़ते। इस अवसर पर हस्तिनापुर (उत्तरांचल) से आये और जैन तीर्थंकर की जन्म स्थली के विकास में जीवन समर्पित करने वाले स्वामी रविन्द्र भैया जी ने गुरुवर के चरणों में श्रीफल चढ़ाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। यह जानकारी नवीन जैन और राज कुमार अजमेरा ने दी।












