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तीर्थंकर जिनेंद्र की पीयूष देशना सभी जीवों के कल्याण का साधन है

कृष्ण प्रतिपदा एकम के दिन को वीर शासन जयंती के रूप में मनाया जाता है

न्यूज सौजन्य- राजेश जैन दद्दू

इंदौर। वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी को ज्ञान प्राप्त होने के 65 दिन बाद कृष्ण प्रतिपदा एकम के दिन विपुलाचल पर्वत पर कुबेर द्वारा निर्मित समोसरण में विराजित सभी जीवों को अंतिम तीर्थेश भगवान महावीर स्वामी की प्रथम बार दिव्य देशना श्रवण करने को मिली थी। जो सभी जीवों के कल्याण का साधन बनी और आज भी है। उक्त उद्गार गुरुवार को कंचनबाग स्थित समोसरण मंदिर में मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने व्यक्त किए। मुनिश्री ने अपने प्रवचन में बताया कि जिस दिन भगवान की वाणी खीरी उसी दिन से भगवान महावीर का शासन प्रारंभ हुआ और इस दिन को जैन धर्मावलंबी वीर शासन जयंती के रूप में मनाते हैं।
मुनि श्री ने इस शुभ दिन से आचार्य पूज्य पाद स्वामी विरचित इस्टोपदेश ग्रंथ का मंगलाचरण करते हुए कहा कि चातुर्मास में आपको अंतरंग में समता भरने वाले इस आध्यात्मिक ग्रंथ पर देशना सुनने को मिलेगी। आप इस देशना को इष्ट की देशना मानकर श्रवण करें। जिससे अध्यात्म की नीति और वैराग्य के मर्म को समझकर आप अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त कर सकें।

धर्म हमें अपना परिचय कराता है और अच्छे से जीना सिखाता है
धर्म सभा के दौरान मुनि श्री सहज सागर जी ने संबोधित करते हुए कहा कि धर्म हमें हमारा परिचय कराता है और मानवता के गुण और अच्छे से जीवन जीना भी सिखाता है।
मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि धर्म सभा के प्रारंभ में निर्मल गंगवाल, अरुण सेठी, महेश कोटिया, आजाद जैन, अशोक खासगीवाला ने मांगलिक क्रियाएं संपन्न की। इस अवसर पर पंडित रतनलालजी शास्त्री, कैलाश वेद उपस्थित रहे। धर्म सभा का संचालन हंसमुख गांधी ने किया।

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